2017 के बाद से छात्रसंघ चुनाव नहीं, हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब, 3 हफ्ते बाद सुनवाई!
इंदौर। मध्य प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में 2017 के बाद से छात्रसंघ चुनाव नहीं होने पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीश आलोक कोकजे और जस्टिस विनय सराफ की पीठ ने जनहित याचिका पर नोटिस जारी कर उच्च शिक्षा विभाग से पूछा है कि सितंबर 2026 में चुनाव कराने के पूर्व निर्देश पर अब तक क्या कार्रवाई हुई। अगली सुनवाई 3 हफ्ते बाद होगी।
अधिवक्ता आदिश टोंग्या की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि चुनाव नहीं होने से कई विद्यार्थियों की पढ़ाई पूरी हो गई, लेकिन उन्हें अपने संस्थानों में छात्र प्रतिनिधि चुनने का अवसर नहीं मिला। याचिका के मुताबिक, उच्च शिक्षा विभाग ने 20 जुलाई 2026 के परिपत्र में सितंबर में चुनाव कराने और पूरी प्रक्रिया 10 कार्यदिवसों में पूरी करने का कार्यक्रम तय किया था।
इसके बावजूद चुनाव नहीं हुए। याचिका में हाईकोर्ट के 3 अगस्त 2026 के आदेश का भी उल्लेख है। उस सुनवाई में सरकार ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के अकादमिक कैलेंडर में छात्रसंघ चुनाव का प्रावधान शामिल करने की बात कही थी। बाद में अदालत में पेश कैलेंडर में सितंबर 2026 चुनाव के लिए निर्धारित किया गया। अब कोर्ट ने विभाग से इस संबंध में की गई कार्रवाई का ब्योरा मांगा है।
सिफारिशें लागू करने की मांग
याचिकाकर्ता ने प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में लिंगदोह समिति की सिफारिशों के अनुसार चुनाव कराने और भविष्य में नियमित चुनाव की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि छात्रसंघ विद्यार्थियों को अपने प्रतिनिधि चुनने, संस्थानों में समस्याएं उठाने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर देते हैं। इसके समर्थन में यूनिवर्सिटी ऑफ केरल विरुद्ध काउंसिल ऑफ प्रिंसिपल्स ऑफ कॉलेजेस, केरल एवं अन्य मामले का हवाला दिया गया है।
याचिका में संविधान के अनुच्छेद का उल्लेख करते हुए छात्रसंघ चुनाव को विद्यार्थियों की लोकतांत्रिक भागीदारी से जुड़ा विषय बताया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अभिनव पी. धनोडकर उपस्थित हुए। अब राज्य सरकार को चुनाव कार्यक्रम पर हुई कार्रवाई और चुनाव नहीं होने के कारण बताने होंगे। मामले की अगली सुनवाई 3 हफ्ते बाद होगी।

Leave a Reply