इंदौर संभाग में कम बारिश से रबी की बोवनी प्रभावित, गेहूं का रकबा घटेगा
इंदौर। इंदौर संभाग के चार जिलों में कम बारिश के कारण रबी की फसलों की बोवनी और सिंचाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। इंदौर, धार, झाबुआ और अलीराजपुर में सामान्य से काफी कम वर्षा हुई है। इसका असर जलाशयों में पानी की उपलब्धता पर भी पड़ा है। ऐसे में कृषि विभाग ने किसानों को कम पानी में तैयार होने वाली फसलें लगाने और गेहूं के बजाय चने की बोवनी बढ़ाने की सलाह दी है।
गुरुवार को कृषि उत्पादन आयुक्त कैसी गुप्ता ने संभाग के कलेक्टरों, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों और कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर रबी सीजन की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने किसानों को कम अवधि में पकने वाली और कम पानी की जरूरत वाली फसलों की ओर प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। साथ ही फसल विविधीकरण पर जोर दिया, ताकि उपलब्ध पानी का इस्तेमाल अधिक क्षेत्र में सिंचाई के लिए किया जा सके।
चार जिलों में औसत से कम वर्षा
इस साल इंदौर जिले में सामान्य औसत 952.2 मिलीमीटर के मुकाबले अब तक 639.7 मिलीमीटर बारिश हुई है। धार में 833.1 मिलीमीटर के औसत के मुकाबले 493.1 मिलीमीटर, झाबुआ में 773.4 मिलीमीटर के मुकाबले 549.3 मिलीमीटर और अलीराजपुर में 879.7 मिलीमीटर के मुकाबले 500.5 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है। अलीराजपुर में बारिश की कमी 43.1 प्रतिशत है, जबकि धार में 40.8, इंदौर में 32.8 और झाबुआ में 29 प्रतिशत कम बारिश हुई है।
संभाग के कई इलाकों में कम वर्षा से बिगड़े हालात
कम बारिश का असर जलाशयों में पानी की उपलब्धता पर भी दिखाई दे रहा है। इंदौर की चोरल डैम और देपालपुर तालाब परियोजनाओं की कुल 32.61 एमसीएम क्षमता के मुकाबले 10.24 एमसीएम पानी ही उपलब्ध है। अलीराजपुर की 10 परियोजनाओं में 103.36 एमसीएम क्षमता के मुकाबले 28.45 एमसीएम पानी बचा है। झाबुआ की सात परियोजनाओं में 354.5 एमसीएम क्षमता के मुकाबले 204.23 एमसीएम पानी उपलब्ध है। धार की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है। वहां सात परियोजनाओं में 6,221.96 एमसीएम क्षमता के मुकाबले 5,877.7 एमसीएम पानी मौजूद है।
संभाग में रबी सीजन 2026-27 के दौरान 17.36 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में बोवनी का लक्ष्य रखा गया है। इसमें गेहूं की बोवनी करीब 9.93 लाख हेक्टेयर और चने की 5.82 लाख हेक्टेयर में प्रस्तावित है। मक्का का लक्ष्य 1.23 लाख हेक्टेयर से अधिक है। इसके अलावा मसूर, मटर, सरसों, अलसी और गन्ने की खेती भी की जाएगी।
गेंहू का रकबा घटेगा, चने का बढ़ेगा
इंदौर जिले में पानी की कमी को देखते हुए गेहूं का रकबा घटाने और चने की बोवनी बढ़ाने की तैयारी है। अब तक जिले में 53 हजार हेक्टेयर में चने की बोवनी हो चुकी है। कृषि विभाग ने इसके लिए 1.05 लाख हेक्टेयर का लक्ष्य रखा है। वहीं, गेहूं का रकबा हर साल के करीब 2.27 लाख हेक्टेयर के मुकाबले इस बार घटाकर 1.18 लाख हेक्टेयर करने का लक्ष्य है। उप संचालक कृषि संदीप यादव के मुताबिक, पानी की उपलब्धता को देखते हुए किसान दलहन की खेती की ओर अधिक रुख कर रहे हैं।
तालाबों में पानी का जलस्तर घटा, सिंचाई का संकट
सिंचाई के क्षेत्र में भी कटौती की स्थिति बन रही है। चोरल डैम से सामान्य तौर पर करीब 3,900 हेक्टेयर में सिंचाई होती है, लेकिन इस बार केवल 2,000 हेक्टेयर क्षेत्र को ही पानी मिल सकेगा। देपालपुर तालाब से करीब 500 हेक्टेयर में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध है। पानी की कमी के कारण फसलों को सामान्य तौर पर तीन से चार बार दी जाने वाली सिंचाई में भी कटौती करनी पड़ सकती है।
कृषि विभाग ने किसानों को स्प्रिंकलर और ड्रिप जैसी सिंचाई पद्धतियां अपनाने तथा खेतों में नमी बनाए रखने के लिए मल्चिंग करने की सलाह दी है। अधिकारियों से कहा गया है कि वे किसानों को फसल चयन, संतुलित उर्वरक उपयोग और जरूरत के अनुसार सिंचाई की जानकारी दें, ताकि कम पानी में भी रबी की फसलों को नुकसान से बचाया जा सके।

Leave a Reply