विजयन मामले में सुप्रीम कोर्ट की हाईकोर्ट से पूछताछ, जांच पर 7 दिन की रोक
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन, उनकी बेटी वीणा थैकंडीइल, दामाद मोहम्मद रियास और अन्य आरोपियों के खिलाफ चल रही जांच पर 7 दिन के लिए रोक लगा दी है। अदालत ने उन्हें केरल हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील करने का मौका दिया है। हाईकोर्ट ने आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए थे।
यह मामला सरकारी कंपनी कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड की ओर से आईटी कंपनी एक्सलॉजिक को कथित भुगतान से जुड़ा है। जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने स्पष्ट किया कि प्राथमिकी पर रोक नहीं लगाई गई है, बल्कि आगे की जांच रोकी गई है।
पक्ष सुने बिना प्राथमिकी के निर्देश
हाईकोर्ट के एकल न्यायाधीश ने 9 अक्टूबर को आरोपियों का पक्ष सुने बिना प्राथमिकी दर्ज करने और जांच के निर्देश दिए थे। 15 अक्टूबर को हाईकोर्ट की खंडपीठ ने उनकी अपील खारिज कर दी। इसके बाद राज्य ने 12 अक्टूबर को प्राथमिकी दर्ज की थी। सुप्रीम कोर्ट में विजयन की ओर से वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा और एन. हरिहरन ने कहा कि अपील खारिज होने के बाद उनके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा था। उन्होंने बताया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी नई प्राथमिकी के आधार पर धनशोधन मामले में नई प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज की है। विजयन को 23 अक्टूबर को पूछताछ के लिए बुलाया गया था।
कोई भी कानून से ऊपर नहीं
सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि कोई कितना भी ऊंचे पद पर हो, कानून से ऊपर नहीं है। अदालत प्राथमिकी पर रोक नहीं लगाएगी, लेकिन आरोपियों को हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखने का मौका मिलना चाहिए। वहां यह तय किया जा सकता है कि मामला संज्ञेय अपराध का है या नहीं और जांच जारी रखने के लिए कानूनी आधार मौजूद हैं या नहीं। जस्टिस वी. मोहना ने हाईकोर्ट के आदेश पर सवाल उठाते हुए पूछा, “ऐसी क्या बहुत बड़ी जल्दबाजी थी कि किसी पक्ष को सुने बिना ही यह आदेश पारित कर दिया गया?”
ईडी दूसरी संस्थाओं के अधिकार क्षेत्र में दखल न दे
जस्टिस बागची ने कहा कि ईडी को हवाला कारोबारियों और पूर्व मुख्यमंत्रियों की जांच करने का अधिकार है। एजेंसी अपना काम करे, लेकिन दूसरी संस्थाओं के अधिकार क्षेत्र में दखल न दे। उन्होंने कहा कि ईडी ने राज्य को सूचना दे दी थी और अब राज्य को कानून के मुताबिक कार्रवाई करनी थी। ऐसे में राज्य की कार्रवाई को लेकर हाईकोर्ट को सीधे जांच के निर्देश देने में सावधानी बरतनी चाहिए थी।
पीठ ने ईडी को साफ शब्दों में कहा कि वह अपनी कानूनी शक्तियों की सीमा में रहकर कार्रवाई करे। अदालत ने प्राथमिकी को बरकरार रखते हुए निर्देश दिया कि अपील पर फैसला होने तक मामले की आगे की जांच नहीं की जाए।

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