हाई प्रोफाइल हस्तियों को फंसाने वाली रेशु चौधरी जेल गई, डेटिंग एप और गुप्त ठिकानों से ब्लैकमेलिंग का खेल!

हाई प्रोफाइल हस्तियों को फंसाने वाली रेशु चौधरी जेल गई, डेटिंग एप और गुप्त ठिकानों से ब्लैकमेलिंग का खेल!

इंदौर। चर्चित हनी ट्रैप-2 मामले की परतें अब धीरे-धीरे खुलने लगी। इस पूरे आपराधिक घटनाक्रम की मुख्य सूत्रधार रेशु चौधरी को पुलिस रिमांड की अवधि समाप्त होने के बाद अदालत के आदेश पर जेल भेज दिया गया। इंदौर पुलिस की क्राइम ब्रांच इस मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है, जिसमें हर दिन नए और चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे।
जांच अधिकारियों को पता चला कि रेशु चौधरी राजनीतिक रसूख वाले व्यक्तियों, बड़े व्यापारियों और समाज के प्रभावशाली लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए आधुनिक तकनीक और सोशल मीडिया का बेहद शातिर तरीके से इस्तेमाल करती थी। उसने सोशल मीडिया पर ‘डॉल्फिन’ नाम से एक बेहद गोपनीय और निजी पहचान बना रखी थी। इसी आभासी पहचान का सहारा लेकर वह रसूखदारों से संपर्क बढ़ाती थी और फिर उन्हें अपनी गिरफ्त में ले लेती थी।

पुलिस को डिजिटल सबूत जुटाने में दिक्कत
इस गिरोह की कार्यप्रणाली इतनी सोची-समझी और चालाकी भरी थी कि पुलिस को शुरुआती दौर में डिजिटल सबूत जुटाने में भारी मशक्कत करनी पड़ रही। रेशु चौधरी और उसकी सहयोगी श्वेता इस बात को लेकर बेहद सतर्क थीं कि कानून के हाथ उन तक न पहुंच सकें। यही वजह है कि दोनों आरोपियों ने किसी भी तरह के आपत्तिजनक वीडियो, अश्लील तस्वीरें या अन्य संदेहास्पद दस्तावेज अपने व्यक्तिगत मोबाइल फोन, कंप्यूटर अथवा किसी भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण में संभाल कर नहीं रखे।

आपत्तिजनक डेटा छुपाया गया
जांचकर्ताओं को गहरा संदेह है कि इस संवेदनशील और अवैध डेटा को इंटरनेट पर किसी सुरक्षित क्लाउड स्टोरेज, गुप्त ऑनलाइन प्लेटफॉर्म या फिर गिरोह के किन्हीं अन्य भरोसेमंद साथियों के पास छुपा कर रखा गया है। इस सोची-समझी रणनीति के कारण ही क्राइम ब्रांच को अब तक कोई सीधा और ठोस डिजिटल प्रमाण हासिल नहीं हो सका है। क्राइम ब्रांच की टीम वर्तमान में इंदौर के ही एक रसूखदार शराब कारोबारी और भवन निर्माता चिंटू ठाकुर से जुड़ी जबरन वसूली की शिकायत पर अपना ध्यान केंद्रित कर रही है।

तस्वीरों को बदलकर ब्लैकमेलिंग
आरोपियों ने पीड़ित को डराने और दबाव बनाने के लिए कुछ तकनीकी रूप से बदली गई तस्वीरों और दस्तावेजों का उपयोग किया था। पुलिस इन सभी कड़ियों को जोड़कर जबरन वसूली और डराने-धमकाने के इस मामले को अदालत में बेहद मजबूत स्थिति में पेश करने की तैयारी कर रही है। इस सिलसिले में पूरी केस डायरी को कानूनी रूप से पुख्ता बनाया जा रहा है ताकि अपराधियों को सख्त सजा दिलाई जा सके।

अलका को दोबारा रिमांड पर लिया गया
इस गिरोह की एक अन्य सक्रिय सदस्य अलका को भी पुलिस ने दोबारा रिमांड पर लेकर गहन पूछताछ करने के बाद न्यायालय में प्रस्तुत किया, जहां से उसे भी जेल अभिरक्षा में भेज दिया गया। पुलिस ने अलका को दोबारा रिमांड पर इसलिए लिया, ताकि ब्लैकमेलिंग से जुड़े कुछ बेहद महत्वपूर्ण समझौतों और कागजातों को बरामद किया जा सके। जांच दल का स्पष्ट कहना है कि अलका, रेशु और श्वेता के साथ मिलकर इस पूरे षड्यंत्र को अंजाम देने में बराबर की हिस्सेदार थी। यह गिरोह पहले लोगों को अपने जाल में फंसाता था, फिर गुपचुप तरीके से वीडियो बनाता था और बाद में तकनीकी रूप से छेड़े गए विजुअल्स का डर दिखाकर मोटी रकम की उगाही करता था।

जिससे शादी हुई, रेशु ने उसे भी नहीं छोड़ा
रेशु चौधरी की पारिवारिक पृष्ठभूमि और निजी जीवन की पड़ताल में यह बात भी सामने आई है कि उसका विवाह छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के रहने वाले महेंद्र नाम के युवक के साथ संपन्न हुआ था। विवाह के पश्चात वह रायपुर स्थित अपने ससुराल में केवल 5 दिन ही रुकी और इसके बाद वह वापस अपने मायके मकरोनिया लौट आई। रेशु के ससुर द्वारा लगाए गए आरोपों के अनुसार, जब परिवार के लोग उसे वापस लिवाने के लिए पहुंचे, तो उसने हर महीने 1 लाख रुपए की भारी-भरकम राशि की मांग रख दी। इसके अतिरिक्त वह अपने पति के साथ ओमान देश के मस्कट शहर में भी कुछ समय तक रही थी, और वहां भी उसकी संदिग्ध गतिविधियों को लेकर कई तरह के संदेह जताए जा रहे हैं। पुलिस अब इन अंतरराष्ट्रीय कड़ियों की भी अपने स्तर पर जांच कर रही है।

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