नलों से निकली गंदगी, कब जागेगा प्रशासन? सीहोर में दूषित पानी ने बढ़ाई लोगों की चिंता
सीहोर। घरों में नल खुलते ही साफ पानी की उम्मीद रहती है, लेकिन जब उसी नल से बदबूदार और मटमैला पानी निकलने लगे, तो चिंता होना लाजिमी है। सीहोर में पेयजल आपूर्ति को लेकर ऐसी ही शिकायतें सामने आई हैं। वार्ड क्रमांक 10, 12 और 23 सहित फ्रीगंज, संजय नगर और मंडी क्षेत्र के रहवासियों ने गंदे पानी की समस्या उठाई है। सवाल सिर्फ पानी के रंग और गंध का नहीं, बल्कि लोगों की सेहत और नगर पालिका की जिम्मेदारी का भी है।
नलों में गंदा पानी, लोगों में भारी नाराजगी!
स्थानीय रहवासियों के मुताबिक, नलों से आने वाला पानी मटमैला और दुर्गंधयुक्त है। आरिफ खान, दीदार खान, सोरमबाई गिरी, शिवनारायण वर्मा और अशोक वर्मा सहित अन्य लोगों ने इस समस्या पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती। जब पानी की गुणवत्ता पर ही सवाल हो, तो परिवारों के लिए उसका इस्तेमाल करना भी चिंता का विषय बन जाता है।
सीवेज चैंबर के पास पाइपलाइन, दूषित पानी का खतरा!
शिकायतों के बीच पेयजल पाइपलाइन के सीवेज चैंबर से गुजरने का मामला भी सामने आया है। यदि पाइपलाइन में कहीं लीकेज या जोड़ में खराबी है, तो दूषित पानी के पेयजल लाइन में पहुंचने की आशंका हो सकती है। हालांकि, इसकी पुष्टि तकनीकी जांच से ही होगी। ऐसे में पाइपलाइन, वाल्व और जोड़ की जांच के साथ प्रभावित क्षेत्रों से पानी के नमूने लेना जरूरी है।
सीएमओ बोले—बस कुछ मिनट आया गंदा पानी!
नगर पालिका सीएमओ सुधीर कुमार श्रीवास्तव के अनुसार, टंकी सूखने और सफाई के दौरान करीब पांच से सात मिनट तक गंदा पानी आया था। उन्होंने बताया कि अब पानी साफ होने की रिपोर्ट मिल चुकी है। हालांकि, अलग-अलग इलाकों से मिल रही शिकायतों के बीच वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए मौके की जांच जरूरी है।
इंदौर जैसी त्रासदी से पहले जागे प्रशासन
दूषित पेयजल से जुड़ी घटनाएं पहले ही गंभीर खतरे की चेतावनी दे चुकी हैं। ऐसे में सीहोर में भी किसी बड़ी घटना का इंतजार किए बिना शिकायतों की निष्पक्ष जांच, पानी की गुणवत्ता की प्रयोगशाला में जांच और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। क्योंकि साफ पानी सुविधा नहीं, हर नागरिक का अधिकार है।

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