कैमोर में एस्बेस्टस कचरे का खतरा, उमंग सिंघार ने उठाए सवाल, 10 लाख टन दूषित कचरा, 5 हजार के बीमार होने का आरोप
कटनी। कैमोर में एस्बेस्टस कचरे से स्वास्थ्य संबंधी खतरे का मामला फिर गरमा गया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रभावित लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि एवरेस्ट कंपनी का जहरीला फाइबर कचरा खेल मैदान में फेंके जाने से कई लोग बीमार हुए और कुछ की मौत भी हुई। उन्होंने निष्पक्ष जांच, कचरे के सुरक्षित निस्तारण और मुआवजे की मांग की।
10 लाख टन कचरा होने का दावा
सिंघार के मुताबिक, कैमोर में करीब 10 लाख टन एस्बेस्टस-दूषित कचरा मौजूद होने की जानकारी सामने आई है। ब्रिटेन की पूर्व औद्योगिक कंपनी टर्नर एंड न्यूऑल से जुड़े इस मामले पर विदेशी मीडिया ने भी जांच की है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कैमोर में 5,000 से अधिक लोग एस्बेस्टस संबंधी बीमारियों से प्रभावित हुए हैं, जबकि पिछले साल के चिकित्सा शिविर में करीब 1,200 अन्य लोगों में बीमारी के लक्षण मिले थे।
सिंघार ने ब्रिटेन से आए मुखर्जी से भी मुलाकात की। बातचीत में बताया गया कि फैक्ट्री के करीब 700 मजदूरों और उनके परिवारों के लगभग 800 लोगों की जांच हुई थी। दावा है कि सभी कैंसर से पीड़ित पाए गए और उन्हें मुआवजा मिला।
मैदान में खेलने से बिगड़ी सोमेश की तबीयत
रिपोर्ट में 40 वर्षीय सोमेश का मामला भी सामने आया है। उनके परिवार का दावा है कि बचपन में खेल मैदान में एस्बेस्टस के संपर्क में आने के बाद वे गंभीर बीमारी से पीड़ित हो गए। परिवार आर्थिक तंगी के कारण कैमोर छोड़ने में असमर्थ है। पूर्व कर्मचारियों के परिवारों ने भी आरोप लगाया कि मजदूरों को एस्बेस्टस के खतरों से बचाने के पर्याप्त साधन और जानकारी नहीं दी गई।
ब्रिटिश मीडिया की रिपोर्ट में 1970 के दशक के कंपनी के दस्तावेजों का हवाला देते हुए बताया गया कि एक डॉक्टर ने भारतीय श्रमिकों को एस्बेस्टस के खतरों से बचाने की जरूरत जताई थी। विशेषज्ञों ने कैमोर को सुरक्षित बनाने की लागत 100 मिलियन पाउंड से अधिक आंकी है। कचरे की जिम्मेदारी और प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने का मुद्दा ब्रिटेन में भी कानूनी बहस का विषय है। इससे जुड़ी औद्योगिक संपत्ति अब सोमानी समूह के पास होने की बात कही गई है।
कलेक्टर बोले, कचरा मिट्टी में दबाया गया
कटनी कलेक्टर ने कहा कि खेल मैदान में फेंके गए फैक्ट्री के कचरे को पहले ही मिट्टी में दबा दिया गया था। दोबारा शिकायत मिलने पर निरीक्षण कर संबंधित विभाग को जरूरी कार्रवाई के निर्देश दिए जाएंगे। बीमार लोगों की शिकायत पर चिकित्सा जांच और इलाज भी कराया जाएगा। 8 अक्टूबर को बैरिस्टर और डॉक्टरों की टीम के कैमोर पहुंचने की बात भी सामने आई है। स्थानीय लोग अब कचरे की स्थिति की जांच, सुरक्षित निस्तारण और प्रभावित परिवारों को राहत देने की मांग कर रहे हैं।

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