एल मुरुगन ने मंत्री पद और राज्यसभा सदस्यता से दिया इस्तीफा, प्रधानमंत्री को लिखा भावुक पत्र
नई दिल्ली। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री डॉ एल मुरुगन ने अपने पद और राज्यसभा की सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया है। अपना इस्तीफा सौंपते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम एक पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने आग्रह किया है कि उन्हें केंद्रीय राज्य मंत्री के दायित्वों से मुक्त किया जाए और राज्यसभा की सदस्यता छोड़ने की अनुमति प्रदान की जाए।
इस पत्र में उन्होंने प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केंद्र सरकार के साथ काम करने के अपने अनुभवों को साझा किया है। इसके साथ ही उन्होंने सूचना एवं प्रसारण, संसदीय कार्य, मत्स्य पालन और पशुपालन मंत्रालयों में मिली जिम्मेदारियों का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि इन अवसरों के माध्यम से उन्हें देश और देशवासियों को गहराई से समझने का अवसर प्राप्त हुआ।
निजी जीवन का भी पत्र में उल्लेख
अपने पत्र में डॉ मुरुगन ने अपने पारिवारिक जीवन और संघर्षों का भी विस्तार से जिक्र किया है। उन्होंने बताया कि वह किसी राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले परिवार से नहीं आते हैं, बल्कि उनका संबंध एक अत्यंत साधारण परिवार से है। उनके माता-पिता दिहाड़ी मजदूर के रूप में कार्य करते थे और पशुपालन से जुड़े रहे हैं। उन्होंने लिखा कि उनके माता-पिता ने कभी इस बात की कल्पना भी नहीं की होगी कि उनका बेटा एक दिन देश की केंद्र सरकार में अपनी सेवाएं देगा।
लोगों का उत्साह सुनहरे भविष्य का संकेत
प्रधानमंत्री मोदी को संबोधित करते हुए उन्होंने पत्र में लिखा कि प्रधानमंत्री की तमिलनाडु की हालिया यात्रा ने उनके मन पर एक गहरा प्रभाव छोड़ा है। उन्होंने देखा कि किस प्रकार हर स्थान पर लोगों ने अत्यंत स्नेह के साथ प्रधानमंत्री का स्वागत किया और उनकी उपस्थिति ने जनसामान्य में एक नई उम्मीद जगाई। लोगों का वह उत्साह उस सुनहरे भविष्य के प्रति उनके सच्चे विश्वास को प्रदर्शित करता है, जिसके निर्माण के लिए प्रधानमंत्री तमिलनाडु में निरंतर कार्यरत हैं। राज्य के प्रति प्रधानमंत्री का समर्पण और जनता के मन में उनके प्रति प्रेम को देखकर उन्हें अत्यधिक गर्व और कृतज्ञता का अनुभव हुआ है, जिससे तमिलनाडु, पार्टी और देश के लिए और अधिक कार्य करने का उनका संकल्प और अधिक मजबूत हुआ है।
राजनीति में किस प्रेरणा से आए, इसका भी जिक्र
डॉ मुरुगन ने महाकवि भारती, सरदार पटेल और डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के राष्ट्रवादी विचारों से प्रेरणा लेते हुए अपने विद्यार्थी जीवन में एबीवीपी से जुड़ने की बात भी साझा की। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और भारतीय जनता पार्टी में लगभग तीन दशकों के अपने सफर का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि उनका मूल मंत्र हमेशा से यही रहा है कि राष्ट्र सर्वोपरि है, उसके बाद पार्टी आती है और अंत में स्वयं का स्थान होता है।
मोदी की नेतृत्व शैली को सराहा
उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की नेतृत्व शैली और भाजपा के उस संकल्प की भी सराहना की, जिसके तहत जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को उनकी मेहनत की उचित पहचान दी जाती है। उन्होंने कहा कि इसी नेतृत्व और विश्वास का परिणाम रहा कि उन्हें राष्ट्रीय आयोग के उपाध्यक्ष पद से लेकर केंद्रीय मंत्रिपरिषद तक में सेवा करने के कई ऐसे अवसर मिले, जिनकी उन्होंने कभी उम्मीद नहीं की थी। विभिन्न मंत्रालयों में कार्य करने के अपने अनुभवों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि इन दायित्वों ने देश और यहां के नागरिकों के बारे में उनकी समझ को और अधिक समृद्ध किया है। इसके अलावा पार्टी द्वारा समय-समय पर उन्हें विधानसभा और लोकसभा चुनाव लड़ने के अवसर भी प्रदान किए गए, जिसके लिए उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें देश और संगठन की सेवा करने के इतने सारे माध्यम मिल सकेंगे।

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