निजी संस्थाओं को ऐतिहासिक स्मारक लीज पर कैसे दिए, सुप्रीम कोर्ट हैरान!

निजी संस्थाओं को ऐतिहासिक स्मारक लीज पर कैसे दिए, सुप्रीम कोर्ट हैरान!

    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के ऐतिहासिक स्मारकों की बदहाल स्थिति, अतिक्रमण, चोरी और तोड़फोड़ पर गहरी नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि राजधानी में कई महत्वपूर्ण स्मारकों की सुरक्षा और संरक्षण में ‘घोर लापरवाही बरती गई है, जो संबंधित अधिकारियों के गैर-जिम्मेदाराना रवैये को दर्शाती है। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने दिल्ली पुलिस को स्मारकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े निर्देश दिए। बेंच ने चेतावनी दी कि अगर ऐतिहासिक जगहों पर अतिक्रमण, तोड़फोड़ या चोरी की घटनाएं बिना रोक-टोक जारी रहीं, तो स्थानीय एसएचओ को निलंबित किया जा सकता है।

      राजीव सूरी बनाम एएसआई और अन्य के मामले की सुनवाई
दोनों जजों की पीठ ने यह टिप्पणी राजीव सूरी बनाम एएसआई और अन्य के मामले की सुनवाई के दौरान की। यह मामला शुरुआत में लोदी काल की एक गुमटी के संरक्षण से जुड़ा था। लेकिन, बाद में अदालत ने इसका दायरा बढ़ाकर दिल्ली के अन्य उपेक्षित ऐतिहासिक स्मारकों तक कर दिया। अदालत ने पहले वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन और डॉ लिडल को सर्वेक्षण के लिए नियुक्त किया था। मामले की अगली सुनवाई 11 मई 2026 को दोपहर 1 बजे होगी। सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर हैरानी जताई कि कई ऐतिहासिक स्मारक निजी संस्थाओं को लीज पर कैसे दे दिए गए।

स्कूल परिसर में मौजूद स्मारकों का जिक्र किया
     अदालत ने विशेष रूप से दिल्ली गॉल्फ क्लब और साधना एनक्लेव स्थित पंचशील पब्लिक स्कूल परिसर में मौजूद स्मारकों का जिक्र किया। कोर्ट ने कहा कि इनके संरक्षण के लिए तय शर्तों का पालन नहीं किया गया। अदालत ने इतिहासकार डॉ स्वप्ना लिडल की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि कई संरचनाओं पर अतिक्रमण, कलात्मक हिस्से गायब और ढांचागत नुकसान हुआ है। कोर्ट ने कहा कि एनडीएमसी ने सतर्कता और निगरानी बनाए रखने के बजाय आंखे मूंदे रखीं।

स्मारक में अतिक्रमण, चोरी, तोड़फोड़ पर निलंबन
    अदालत ने कहा कि अगर किसी स्मारक में अतिक्रमण, चोरी या तोड़फोड़ पाई जाती है तो संबंधित एसएचओ निलंबित हो सकते हैं। जरूरत पड़ने पर डीसीपी, पुलिस कमिश्नर की जवाबदेही तय होगी। अदालत ने एनडीएमसी अध्यक्ष को 11 मई को पेश होने का आदेश दिया है। कोर्ट ने पूछा कि लीज पर दिए गए क्षेत्रों स्मारकों के संरक्षण की निगरानी क्यों नहीं हुई। कोर्ट ने शेख सराय स्थित 1397 में बने ‘खरबूजे का गुबद’ को निजी स्कूल को दिए जाने के मामले में दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है।

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