मालवा-निमाड़ के गाँवों और शहरों के बीच परिवहन क्रांति, सीएम सुगम परिवहन सेवा योजना से बदलेगी सूरत

मालवा-निमाड़ के गाँवों और शहरों के बीच परिवहन क्रांति, सीएम सुगम परिवहन सेवा योजना से बदलेगी सूरत

भोपाल। प्रदेश के यातायात के क्षेत्र में एक बहुत बड़ा और कल्याणकारी परिवर्तन होने जा रहा है, जो ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच के सफर को बेहद आसान और सुरक्षित बना देगा। राज्य सरकार द्वारा आरंभ की गई ‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना’ के माध्यम से मालवा और निमाड़ अंचल की पूरी यातायात प्रणाली को एक नया रूप देने की तैयारी पूरी कर ली गई है। इस नई व्यवस्था के अंतर्गत इंदौर और उज्जैन संभागों के रास्तों पर कुल 979 नई बसें चलाई जाएंगी। इस पूरी सेवा को आधुनिक तकनीकी व्यवस्था से भी जोड़ा जा रहा है, जिससे यात्रियों को डिजिटल निगरानी और तुरंत मिलने वाली चिकित्सा वाहन जैसी बेहतरीन सुविधाएं प्राप्त हो सकेंगी।
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने मंत्रालय में परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक अति महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में उन्होंने इस बड़ी योजना को बिना किसी विलंब के जमीन पर उतारने के सख्त आदेश जारी किए हैं। पूरे राज्य के स्तर पर देखा जाए तो इस योजना के प्रथम चरण में संपूर्ण मध्य प्रदेश के भीतर 5206 बसें चलाई जानी हैं, जिसमें से सबसे अधिक संख्या मालवा और निमाड़ क्षेत्र के हिस्से में आई है।

इंदौर-उज्जैन संभाग के ग्रामीण रास्तों पर दौड़ेंगी बसें
संभाग के अनुसार पूरी संख्या को देखें तो इंदौर संभाग के 121 विभिन्न रास्तों पर 608 बसों को चलाया जाएगा। इसके साथ ही, उज्जैन संभाग के 120 रास्तों पर 371 बसें आम जनता की सेवा के लिए सड़कों पर उतरेंगी। इस पूरे प्रयास का सबसे सीधा और बड़ा लाभ उन ग्रामीण और छोटे कस्बों के रहने वाले लोगों को प्राप्त होगा, जो अब तक यात्रा करने के लिए केवल निजी वाहनों या बहुत ही कम यातायात व्यवस्था के भरोसे रहने के लिए विवश थे। सरकार का यह साफ सोचना है कि इस नियमित और सुव्यवस्थित सरकारी परिवहन सेवा के आरंभ होने से गाँवों और शहरों के बीच की दूरी घटेगी तथा आपसी मेलजोल बढ़ेगा। इससे प्रतिदिन यात्रा करने वाले छात्र-छात्राओं, नौकरी करने वाले लोगों, छोटे-बड़े दुकानदारों और चिकित्सा के लिए शहर आने वाले बीमार लोगों को बहुत बड़ी सहायता प्राप्त होगी।

डिजिटल कैमरों और आधुनिक यंत्रों से होगी यात्रियों की सुरक्षा
यह नई योजना मात्र बसें चलाने तक ही सिमटी हुई नहीं है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा को पूरी तरह पक्का करने के लिए इसमें आधुनिक तकनीक को शामिल किया गया है। इसके अंतर्गत एक विशेष यातायात नियंत्रण प्रणाली बनाई जा रही है जिससे बसों की हर समय की स्थिति को देखा जा सकेगा और उनके रास्तों की निगरानी सीधे डिजिटल नियंत्रण कक्ष से की जाएगी। इसके साथ ही सड़कों पर बिजली से चलने वाली पहचान प्रणाली भी स्थापित की जाएगी। इस व्यवस्था में सड़कों के किनारों पर विशेष प्रकार के कैमरे लगाए जाएंगे जो सामने से निकलने वाले वाहनों के नंबरों को स्वयं ही पढ़ लेंगे और उनके कागजातों की इंटरनेट के माध्यम से जाँच कर लेंगे। इस प्रबंध से कागजों में कमी होने या यातायात के नियमों को तोड़ने वाले वाहनों पर तुरंत कानूनी कदम उठाना बेहद सरल हो जाएगा।

सड़क हादसों में आधे घंटे में उपचार, नया सुरक्षा सचिवालय
मार्गों पर होने वाली दुर्घटनाओं के समय घायल लोगों को तुरंत प्राथमिक उपचार देने के लिए भी सरकार ने एक बहुत ही मानवीय योजना तैयार की है। इसके लिए राज्य के उन जगहों की खोज की जाएगी जहाँ सबसे अधिक दुर्घटनाएँ होती हैं। चिकित्सा और परिवहन से जुड़े विभागों के सभी एम्बुलेंस वाहनों को एक ही नियंत्रण केंद्र से जोड़ दिया जाएगा, जिससे किसी भी दुर्घटना की सूचना मिलते ही सबसे पास में खड़ी एम्बुलेंस अपने आप चौकन्नी होकर घटना वाली जगह पर पहुँच जाए।
सरकार ने यह पक्का उद्देश्य सामने रखा है कि किसी भी दुर्घटना की दशा में पीड़ित व्यक्ति तक 30 मिनट से भी कम समय के भीतर चिकित्सीय सहायता पहुँचा दी जाए। इसके साथ ही, पूरे प्रदेश की यातायात व्यवस्था को एक नया ढांचा देने के लिए एक स्वतंत्र मध्य प्रदेश राज्य सड़क सुरक्षा सचिवालय की स्थापना की जा रही है। इसके अलावा राज्य की परिवहन चौकियों और कर वसूलने वाले नाकों को भी पूरी तरह आधुनिक बनाने का काम बहुत तेजी से आरंभ कर दिया गया है।

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