कैंसर इलाज की दवाइयों के दाम घटेंगे, सरकार ने ट्रेड मार्जिन 30% तक सीमित किया, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश
नई दिल्ली। कैंसर रोगियों को राहत पहुंचाते हुए सरकार ने सभी गैर-अधिसूचित कैंसर-रोधी औषधियों पर ट्रेड मार्जिन को अधिकतम खुदरा मूल्य यानी एमआरपी के 30% तक सीमित करने का बड़ा कदम उठाया। इस व्यवस्था के अंतर्गत स्वदेशी और आयातित, ब्रांडेड व जेनेरिक, तथा पेटेंट प्राप्त एवं गैर-पेटेंट वाली सभी श्रेणियां समाहित होंगी। इस माह के अंतिम चरण से लागू होने जा रहे इस निर्णय के फलस्वरूप कुल 110 कैंसर-रोधी औषधियों की दरों में गिरावट आएगी, जिनमें 35 पेटेंट वाली दवाएं भी शामिल हैं।
शीर्ष अदालत ने 29 सितंबर को कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं के मनमाने दामों पर गहरी चिंता व्यक्त की थी। सभी औषधियों पर एकसमान 16% ट्रेड मार्जिन की वकालत करते हुए जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता के पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के समक्ष कड़ी टिप्पणी की थी कि यह एक तरह से खुली लूट है।
चिंता जताई थी सुप्रीम कोर्ट ने
सुप्रीम कोर्ट ने उदाहरण देते हुए कहा था कि जो कैंसर औषधि खुदरा व्यापारी को 2,700 रुपये में प्राप्त होती है, उसका एमआरपी 27,000 रुपये अंकित कर दिया जाता है। हालांकि, आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि यह निर्णय इस न्यायिक मामले से अलग है और इस पर वर्ष 2019 से ही विचार-विमर्श चल रहा था। स्वास्थ्य मंत्रालय ने औषधियों की सूची तैयार करने हेतु एक विशेषज्ञ समिति गठित की है और अन्य दवाओं के दाम तय करने के मामले में फूंक-फूंक कर कदम उठाने की बात कही है।
समिति गठित करने का निर्देश
दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक समर्पित समिति गठित करने का निर्देश दिया है जो प्राप्त सुझावों का अध्ययन कर दवा निर्माताओं को अनैतिक विपणन पद्धतियों में शामिल होने से रोकने हेतु अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करेगी। न्यायमूर्ति द्वय की पीठ ने यह आदेश उस याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया जिसमें मांग की गई थी कि जब तक कोई ठोस विधान नहीं बन जाता, तब तक शीर्ष अदालत ही औषधि कंपनियों के अनुचित विपणन को नियंत्रित करने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करे।

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