इंदौर में 3000 पेटी शराब जब्त, 13 मौतों के बाद कार्रवाई पर उठे सवाल

मध्य प्रदेश में शराब से जुड़ी मौतों के मामले के बीच इंदौर में 3000 पेटी शराब जब्त की गई है। अब कार्रवाई के समय और आबकारी विभाग की निगरानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
इंदौर में 3000 पेटी शराब जब्त, 13 मौतों के बाद कार्रवाई पर उठे सवाल

इंदौर। देवास में जहरीली शराब से 13 लोगों की मौत के बाद अब प्रदेश में अवैध शराब के कारोबार पर कार्रवाई तेज होती नजर आ रही है। इंदौर के देवगुराड़िया इलाके में आबकारी विभाग और DGGI की संयुक्त टीम ने दो कंटेनरों से करीब 3000 पेटी शराब जब्त की है। जब्त शराब की कीमत करीब 3 करोड़ रुपये बताई जा रही है। कार्रवाई के दौरान दोनों कंटेनरों के ड्राइवर मौके से फरार हो गए। अब सवाल यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में शराब कहां से आई और इसे किस जगह पहुंचाया जाना था?
 
देवास में 54 लीटर शराब जब्त, 10 आरोपी गिरफ्तार
देवास में हुई मौतों के मामले में पुलिस ने अवैध शराब की बिक्री के आरोप में 10 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों में दो वाइन शॉप के मैनेजर और सेल्समैन भी शामिल हैं। कार्रवाई के दौरान छह कार्टन में रखी 54 लीटर देशी शराब जब्त की गई। इसके अलावा एक कार, 10 मोबाइल फोन और नकदी समेत करीब 7.25 लाख रुपये का सामान जब्त किया गया है। पुलिस अब इस नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने और शराब की सप्लाई के स्रोत का पता लगाने में जुटी है। जब्त शराब के नमूने जांच के लिए फॉरेंसिक लैब भेजे जाने हैं। मौतों और शराब के बीच संबंध की पुष्टि जांच रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी।
 
मौतों के बाद ही क्यों तेज हुई कार्रवाई?
देवास के चंदाना और बिंजाना गांवों में करीब 20 दिनों के भीतर 13 लोगों की मौत हुई। परिजनों और ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि शराब पीने के बाद लोगों की तबीयत बिगड़ी और उनकी मौत हो गई। हालांकि, मौतों की वास्तविक वजह की जांच जारी है। इन घटनाओं ने प्रदेश की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सवाल उठना लाजिमी है कि अवैध शराब के कारोबार पर ऐसी सख्ती पहले क्यों नहीं दिखाई गई? अगर समय रहते प्रभावी कार्रवाई होती, तो क्या कई परिवारों को इस दर्द से बचाया जा सकता था?
 
 
विपक्ष की आवाज के बाद कार्रवाई ने पकड़ी रफ्तार
प्रदेश में अवैध शराब के मुद्दे पर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर इस मुद्दे को उठाया और सरकार से जवाबदेही की मांग की। वहीं, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी देवास पहुंचकर प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और प्रशासन की शुरुआती प्रतिक्रिया पर सवाल उठाए। इसके बाद मामले की जांच तेज हुई और उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की गई। देवास के कलेक्टर और एसपी का तबादला भी किया गया।
 
अब जांच के घेरे में शराब की सप्लाई
इंदौर में जब्त शराब के मामले में अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि इतनी बड़ी खेप कहां से लाई गई थी और इसे कहां पहुंचाया जाना था। दोनों कंटेनरों के ड्राइवरों का फरार होना भी जांच का अहम पहलू है। वहीं, देवास में पुलिस अवैध शराब की बिक्री से जुड़े कथित नेटवर्क की जांच कर रही है। फिलहाल, इंदौर में जब्त शराब और देवास की मौतों के बीच किसी संबंध की पुष्टि नहीं हुई है।
 
कार्रवाई के साथ जवाबदेही भी जरूरी
अवैध शराब के खिलाफ छापेमारी जरूरी है, लेकिन सवाल सिर्फ जब्ती तक सीमित नहीं होना चाहिए। इतनी बड़ी खेप किसकी थी, इसे किसके संरक्षण में लाया जा रहा था और जिम्मेदार लोगों तक जांच कब पहुंचेगी? देवास में हुई मौतों के बाद जनता को केवल कार्रवाई की खबर नहीं, बल्कि ठोस जवाब चाहिए। सवाल यही है—अगर समय रहते सख्ती की जाती, तो क्या इतने परिवारों को उजड़ने से बचाया जा सकता था?

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