जहरीली शराब कांड: आबकारी आयुक्त पर कार्रवाई क्यों नहीं? उमंग सिंघार ने CM मोहन यादव से पूछा सवाल
भोपाल। सागर और देवास में जहरीली शराब से मौतों के मामलों ने मध्यप्रदेश की मोहन यादव सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दोनों जिलों के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक (एसपी) को हटाने के बाद अब प्रदेश के आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना पर कार्रवाई नहीं होने को लेकर सरकार घिर गई है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव पर निशाना साधते हुए पूछा है कि जब जहरीली शराब से लोगों की जान चली गई और कई लोगों की आंखों की रोशनी चली गई, तब जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई में यह अंतर क्यों?
सिंघार ने अपनी एक्स पोस्ट में मुख्यमंत्री को घेरते हुए लिखा कि सागर और देवास शराब कांड के बाद आपने एसपी और कलेक्टर को तो हटा दिया, लेकिन अपने मित्र आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना पर कार्रवाई क्यों नहीं की? इतनी मौतों के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर मुख्यमंत्री कैसी मित्रता निभा रहे हैं। उन्होंने पूछा कि जनता को जवाब चाहिए कि आबकारी आयुक्त को कब तक बचाया जाता रहेगा।
जिलों में कार्रवाई, मुख्यालय पर चुप्पी क्यों?
जहरीली शराब से मौतों के मामले में कलेक्टर और एसपी को हटाने का फैसला प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की दिशा में उठाया गया कदम बताया जा सकता है, लेकिन इससे पूरे मामले की जिम्मेदारी तय नहीं हो जाती। अवैध शराब की बिक्री रोकना, आबकारी नियमों का पालन कराना और विभागीय अमले की निगरानी करना भी शासन की जिम्मेदारी है। ऐसे में प्रदेश के आबकारी विभाग की भूमिका की पड़ताल जरूरी है।
सवाल यह है कि जिन क्षेत्रों में जहरीली शराब लोगों की जान लेने और आंखों की रोशनी छीनने का कारण बनी, वहां अवैध शराब के कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए क्या कदम उठाए गए थे? निगरानी व्यवस्था में कहां चूक हुई? स्थानीय स्तर पर लापरवाही हुई या विभागीय नियंत्रण में कमी रही? इन सवालों का जवाब जांच से सामने आना चाहिए।
जवाबदेही तय करना जरूरी
सागर और देवास की घटनाओं ने प्रभावित परिवारों को गहरा आघात पहुंचाया है। ऐसे मामलों में केवल अधिकारियों को हटाने से लोगों की चिंता दूर नहीं होगी। सरकार को यह बताना होगा कि दोषियों की पहचान के लिए क्या कार्रवाई हुई और भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए क्या व्यवस्था की जा रही है।

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