MP पुलिस में बड़ा फेरबदल: 15 डीएसपी फिर से बने इंस्पेक्टर, जानें वजह

MP पुलिस में बड़ा फेरबदल: 15 डीएसपी फिर से बने इंस्पेक्टर, जानें वजह

भोपाल। मध्य प्रदेश के पुलिस महकमे से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। राज्य के गृह विभाग ने हाल ही में एक बड़ा कदम उठाते हुए डीएसपी के पद पर प्रमोट किए गए 15 पुलिस अधिकारियों के आदेश को निरस्त कर दिया है। इन सभी अधिकारियों को अब वापस उनके पुराने पद यानी निरीक्षक के रूप में अपनी सेवाएं देनी होंगी। इस फैसले के बाद से महकमे में हलचल तेज हो गई है।

विभागीय जांच और आपराधिक मामलों के कारण हुई कार्रवाई
जानकारी के अनुसार, इन सभी पुलिस अधिकारियों को इसी साल जुलाई के महीने में इंस्पेक्टर से पदोन्नत करके डीएसपी बनाया गया था। लेकिन बाद में जब इन मामलों की गहराई से समीक्षा की गई, तो कई गंभीर बातें सामने आईं। समीक्षा के दौरान अधिकारियों के खिलाफ चल रही विभागीय जांच, कुछ मामलों में आपराधिक प्रकरण दर्ज होने और पहले से मिले दंड के प्रभावशील होने जैसी स्थितियां प्रकाश में आईं। इन तमाम वजहों के चलते नियमानुसार इन्हें पदोन्नति के योग्य नहीं पाया गया। इसके बाद विभागीय पदोन्नति समिति की संस्तुति के आधार पर गृह विभाग ने 16 अक्टूबर को इनके प्रमोशन के आदेश रद्द करने का आधिकारिक फरमान जारी कर दिया, जो अब सार्वजनिक हुआ है।

अलग-अलग संवर्गों के अधिकारी आए जद में
इस पूरी कार्रवाई से पुलिस विभाग के विभिन्न संवर्गों से जुड़े अधिकारी प्रभावित हुए हैं। जिन 15 अधिकारियों की पदोन्नति वापस ली गई है, उनमें सामान्य निरीक्षक संवर्ग के कुल 12 अधिकारी शामिल हैं। इसके अलावा विशेष शाखा से एक निरीक्षक, विशेष सशस्त्र बल यानी विसबल से एक निरीक्षक और एक आरक्षित निरीक्षक की पदोन्नति भी इस गाज का शिकार हुई है। इन प्रभावित अधिकारियों में महेंद्र सिंह भदौरिया, विपिन बिहारी सिंह, योगेंद्र सिंह जादौन, महेंद्र सिंह परमार, शैलेश कुमार मिश्रा, भरत सिंह ठाकुर, मनीष मिश्रा, विनय आर्य, सोमलता मलिक, सुरेश चंद्र नागर, दीपक सेजवार और संतोष कुमार पंद्रे शामिल हैं। वहीं अन्य संवर्गों में विशेष शाखा की निरीक्षक कल्पना रघुवंशी, विसबल के निरीक्षक देवेंद्र दुबे और आरक्षित निरीक्षक अर्जुन सिंह पंवार का नाम भी इस सूची में है।

पहले भी हो चुकी है बड़े पैमाने पर पदोन्नति निरस्त
खास बात यह है कि मध्य प्रदेश पुलिस में प्रमोशन रद्द होने का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले 1 सितंबर को भी पुलिस मुख्यालय भोपाल की तरफ से एक कड़ा आदेश निकाला गया था। उस दौरान जुलाई महीने में ही पदोन्नत किए गए 78 उप निरीक्षकों और कार्यवाहक निरीक्षकों की पदोन्नति भी निरस्त कर दी गई थी। सामान्य प्रशासन विभाग के दिशा-निर्देशों के तहत जब उनकी पात्रता जांची गई, तो वे भी विभागीय जांच और आपराधिक मामलों की वजह से अपात्र पाए गए थे।
अब ताजा मामले में 15 डीएसपी स्तर के अधिकारियों के डिमोट होने से यह साफ हो गया है कि शासन प्रशासन अब पदोन्नति के बाद भी दस्तावेजों और मामलों की कड़ी पड़ताल कर रहा है। यदि किसी स्तर पर पात्रता में कमी पाई जाती है, तो पहले दिए गए लाभ को वापस लेने से भी गुरेज नहीं किया जा रहा है। इस पूरी कार्रवाई ने एक बार फिर से पुलिस विभाग की आंतरिक पदोन्नति और समीक्षा की प्रक्रिया को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

ज़रूर पढ़ें (Latest News)

Live TV LIVE STREAM