भोपाल। मध्य प्रदेश में व्यावसायिक गतिविधियों को दिन-रात संचालित करने का रास्ता साफ हो गया है। राज्य में अब मॉल, रेस्टोरेंट, थिएटर, बिजनेस सेंटर और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) से जुड़े दफ्तर 24 घंटे खोले जा सकेंगे। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने मध्य प्रदेश कार्यस्थल सशक्तीकरण संहिता (श्रम शक्ति संहिता) 2026 संशोधन विधेयक को अपनी अनुमति दे दी है। इस व्यवस्था को शहरों में लागू करने का निर्णय स्थानीय निकायों और जिला प्रशासन की सिफारिश के आधार पर सरकार लेगी, जिसमें कानून-व्यवस्था की स्थिति को प्राथमिक आधार माना जाएगा। इसके साथ ही राज्यपाल ने वर्ष 2026-27 के पहले अनुपूरक बजट से संबंधित विनियोग विधेयक को भी मंजूरी दे दी है। वहीं समान नागरिक संहिता (यूसीसी) से जुड़े विधेयक को उन्होंने अंतिम राय के लिए अपनी विधि एवं विधायी शाखा के पास भेजा है।
दूसरे राज्यों के मॉडल के अध्ययन और कानून में संशोधन के बाद फैसला
देश के कई अन्य हिस्सों जैसे महाराष्ट्र, कर्नाटक, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और तेलंगाना के शहरी इलाकों में नाइट लाइफ और 24 घंटे व्यावसायिक काम-काज की व्यवस्था पहले से जारी है। केंद्र सरकार ने भी सभी प्रदेशों को कारोबारी गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पुराने कायदे-कानूनों में जरूरी बदलाव करने की सलाह दी थी। इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने इन राज्यों के मॉडल का अध्ययन कराया।
इसके बाद मध्य प्रदेश दुकान स्थापना अधिनियम, 1958 के नियमों की धारा-6 में बदलाव करते हुए विधानसभा से नया संशोधन विधेयक पारित कराया गया और इसे श्रम शक्ति संहिता 2026 में जोड़ दिया गया। इससे पहले इंदौर के एबी रोड पर देर रात तक दुकानें खुली रखने का एक प्रयोग शुरू हुआ था, जिसे कुछ ही महीनों में बंद करना पड़ा था।
आईटी कंपनियों को सुविधा और नाइट शिफ्ट कर्मचारियों के अधिकार
राज्य में आईटी क्षेत्र का तेजी से विस्तार हो रहा है और कई बड़ी कंपनियां यहां निवेश कर रही हैं। इस सेक्टर में 24 घंटे के दौरान 3 अलग-अलग शिफ्टों में काम चलता है। देर रात काम करने वाले कर्मचारियों के लिए खाने-पीने और जरूरी सुविधाओं के बाजार बंद रहने से दिक्कतें आती थीं। वर्ष 2024 में श्रम विभाग ने भोपाल और इंदौर में इसका एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने का प्रस्ताव तैयार किया था। बाद में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने इस योजना का विस्तार पूरे प्रदेश के सभी नगर निगमों और औद्योगिक क्षेत्रों तक करने का निर्णय लिया।
नए कानून में रात की शिफ्ट में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए काम के घंटों का हिसाब-किताब दिन की शिफ्ट से अलग रखने का नियम बनाया गया है। इसके तहत कंपनी या नियोक्ता किसी कर्मचारी से हफ्ते के तय घंटे पूरे कराने के लिए एक दिन में काम के घंटे बढ़ा सकता है, लेकिन यह सीमा 12 घंटे से अधिक नहीं हो सकती।
महिला सुरक्षा और दस्तावेजों को बंधक न रखने से जुड़ी सख्ती
नई संहिता के तहत महिलाओं को भी रात की पाली में काम करने का अवसर मिलेगा। हालांकि इसके लिए संबंधित संस्थान को सुरक्षा के पूरे इंतजाम करने होंगे और महिला कर्मचारियों को घर से लाने व वापस सुरक्षित पहुंचाने की जिम्मेदारी उठानी होगी। इसके अलावा नई व्यवस्था में एक और बड़ा बदलाव करते हुए कंपनियों द्वारा कर्मचारियों के मूल दस्तावेज जमा रखने पर रोक लगा दी गई है। पहले कुछ संस्थान कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने से रोकने के लिए उनके असली कागजात अपने पास रख लेते थे, जिसे अब सख्त नियम के जरिए प्रतिबंधित कर दिया गया है।