‘एसआईआर’ पर भी उठे सवाल, ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट अगले हफ्ते सुनवाई करेगा!
नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में चुनाव आयोग के कामकाज और कथित एकतरफा फैसलों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट अगले सप्ताह सुनवाई करेगा। वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने मंगलवार, 29 सितंबर को भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने मामला रखा। उनकी दलील सुनने के बाद पीठ ने इसे अगले सप्ताह सुनवाई के लिए लगाने को कहा।
विकास सिंह ने कहा कि चुनाव आयोग बहु-सदस्यीय संस्था है और कानून के अनुसार उसके फैसले सर्वसम्मति या बहुमत के आधार पर होने चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) सहित दूसरे अहम फैसले आयोग के सभी सदस्यों की सहमति या बहुमत के बिना लिए गए हैं, तो यह गंभीर मामला है और इसकी जांच की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि आयोग को बहु-सदस्यीय बनाने का उद्देश्य ही सामूहिक निर्णय प्रक्रिया सुनिश्चित करना था। मौजूदा घटनाक्रम को देखते हुए यह सवाल उठता है कि SIR की पूरी प्रक्रिया शुरू करने के लिए आयोग ने वास्तव में कोई सामूहिक फैसला लिया था या नहीं।
14 फैसलों पर दो चुनाव आयुक्तों ने दर्ज कराई आपत्ति
मामले की पृष्ठभूमि में 23 सितंबर को प्रकाशित इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट भी है। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने नवंबर 2025 से सितंबर 2026 के बीच चुनाव आयोग के विभिन्न फैसलों और प्रक्रियाओं पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कराईं। इनमें मतदाता सूची में बदलाव, नए मतदाताओं के लिए फॉर्म-6 में किए गए परिवर्तन और मतदाता सूची से जुड़े तकनीकी व प्रशासनिक फैसले शामिल थे। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ फैसले उनकी जानकारी या सहमति के बिना लिए जाने पर सवाल उठाए थे। SIR से जुड़े फॉर्म-6 में किए गए बदलाव को लेकर भी उन्होंने आपत्ति दर्ज की थी।
25 सितंबर को दाखिल हुई याचिका
इन घटनाक्रमों के बाद 25 सितंबर को शैलेंद्र मणि त्रिपाठी नाम के वकील ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की। याचिका में ज्ञानेश कुमार समेत संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। साथ ही उन फैसलों को निरस्त करने की मांग की गई है, जिन पर चुनाव आयुक्तों ने आपत्ति जताई थी।
याचिका में यह भी सवाल उठाया गया है कि यदि आयोग के फैसले सामूहिक रूप से लिए जाने जरूरी हैं, तो किसी एक सदस्य द्वारा आयोग की सामूहिक शक्तियों का इस्तेमाल किस अधिकार के तहत किया गया। याचिकाकर्ता ने SIR और उससे जुड़े फैसलों की वैधता की भी न्यायिक जांच की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट अब अगले सप्ताह इस पूरे मामले में दलीलें सुनेगा।

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