रतलाम के महालक्ष्मी मंदिर में सजेगा करोड़ों का खजाना, नोटों के फूल और सोने के गहने होंगे आकर्षण
रतलाम। दीपावली पर आपने मंदिरों को फूलों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजा तो खूब देखा होगा, लेकिन मध्यप्रदेश के रतलाम में एक ऐसा मंदिर है, जहां मां महालक्ष्मी का दरबार नोटों की गड्डियों, सोने-चांदी के आभूषणों और कीमती जेवरों से सजाया जाता है। माणक चौक स्थित ऐतिहासिक महालक्ष्मी मंदिर में इस बार भी दीपोत्सव की तैयारियां शुरू हो गई हैं। धनतेरस से श्रद्धालु मां के इस अनूठे श्रृंगार के दर्शन कर सकेंगे।
करोड़ों के नोटों और गहनों से सजेगा मां का दरबार
इस मंदिर की सबसे खास परंपरा यह है कि यहां श्रद्धालु अपनी श्रद्धा से नकदी और कीमती आभूषण सजावट के लिए जमा कराते हैं। इनसे मंदिर में नोटों के फूल, गमले और वंदनवार तैयार किए जाते हैं। साथ ही सोने-चांदी के गहनों और सिल्लियों से भी विशेष सजावट होती है। इस बार अब तक करीब 600 श्रद्धालु नोटों की गड्डियां जमा करा चुके हैं। इनमें एक रुपये से लेकर 500 रुपये तक के नोट शामिल हैं। रतलाम के अलावा गुजरात, राजस्थान और मध्यप्रदेश के दूसरे जिलों से भी लोग पहुंच रहे हैं।
पांच दिन बाद वापस मिलता है पूरा धन
इस परंपरा की सबसे दिलचस्प बात यह है कि श्रद्धालुओं का पैसा और आभूषण मंदिर में स्थायी रूप से नहीं रखे जाते। पांच दिनों तक मां के श्रृंगार में शामिल रहने के बाद दीपावली के पांचवें दिन उन्हें प्रसाद स्वरूप वापस लौटा दिया जाता है। मंदिर में धन और आभूषण जमा कराने के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और ओटीपी की व्यवस्था भी की गई है।
धनतेरस पर मिलती हैं कुबेर की पोटलियां
धनतेरस के दिन मंदिर में कुबेर की पोटलियां भी बांटी जाती हैं। श्रद्धालु इन्हें शुभता और समृद्धि का प्रतीक मानकर अपनी तिजोरी में रखते हैं। मान्यता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि और बरकत बनी रहती है।
नौ स्वरूपों में विराजमान हैं मां महालक्ष्मी
मंदिर की एक और विशेषता यहां मां महालक्ष्मी के नौ स्वरूपों का विराजमान होना है। दीपावली के दौरान लाखों रुपये के आभूषण और नकदी जमा होने के कारण सुरक्षा के भी विशेष इंतजाम किए गए हैं। मंदिर परिसर में 24 सीसीटीवी कैमरों से निगरानी होगी और सुरक्षा गार्ड तैनात रहेंगे। प्रशासनिक अधिकारी भी तैयारियों का जायजा ले चुके हैं।
आस्था, परंपरा और अनोखे श्रृंगार का यह संगम हर साल हजारों श्रद्धालुओं को रतलाम खींच लाता है।

Leave a Reply