मिलन प्रधान की जमानत पर 5 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, 6 अक्टूबर को नंदीग्राम में उपचुनाव!
नई दिल्ली। नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव से पहले कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान की अंतरिम जमानत का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। पश्चिम बंगाल सरकार ने कलकत्ता हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें प्रधान को 20 अक्टूबर तक अंतरिम जमानत दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की तत्काल सुनवाई की मांग स्वीकार नहीं की और मामले को 5 अक्टूबर के लिए सूचीबद्ध किया है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली 3 सदस्यीय पीठ के समक्ष बुधवार को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने राज्य सरकार की ओर से याचिका का उल्लेख किया। उन्होंने मामले की जल्द सुनवाई का अनुरोध करते हुए कहा कि प्रधान को चुनाव लड़ने और प्रचार के लिए अंतरिम जमानत मिली है। उनका कहना था कि यदि चुनाव के बाद सुनवाई हुई तो राज्य की चुनौती का उद्देश्य प्रभावित हो सकता है। हालांकि, अदालत ने गुरुवार को सुनवाई करने से इनकार करते हुए 5 अक्टूबर की तारीख तय कर दी।

6 आपराधिक मामलों में अंतरिम जमानत
कलकत्ता हाईकोर्ट ने 29 सितंबर को प्रधान को 2007 में नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण आंदोलन के दौरान दर्ज 6 आपराधिक मामलों में अंतरिम जमानत दी थी। इन मामलों में हत्या, हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट से जुड़े आरोप शामिल हैं। हाईकोर्ट ने उन्हें 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव में प्रचार करने की अनुमति दी थी और 21 अक्टूबर को संबंधित ट्रायल कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है।
हाईकोर्ट के आदेश पर सवाल
राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के आदेश पर सवाल उठाते हुए कहा है कि प्रधान के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले लंबित हैं। सॉलिसिटर जनरल ने सुनवाई जल्द कराने की मांग करते हुए यह भी कहा कि उन्हें चुनाव के लिए अंतरिम जमानत दी गई है। दूसरी ओर, हाईकोर्ट ने अपने आदेश में पुराने मामलों और गिरफ्तारी की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने के लिए सीमित अवधि की अंतरिम राहत दी थी।
नंदीग्राम सीट शुभेंदु अधिकारी के सीट छोड़ने के बाद खाली हुई है। अधिकारी ने विधानसभा चुनाव में 2 सीटों से जीत हासिल की थी और बाद में भवानीपुर सीट अपने पास रखने का फैसला किया। नंदीग्राम में 6 अक्टूबर को मतदान होना है और मतगणना 9 अक्टूबर को होगी।
सभी की नजर 5 अक्टूबर की सुनवाई पर
अब सभी की नजर 5 अक्टूबर की सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर है। इसी दिन यह स्पष्ट होगा कि पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से अंतरिम जमानत के खिलाफ दायर चुनौती पर अदालत क्या आदेश देती है। फिलहाल कलकत्ता हाईकोर्ट से मिली अंतरिम जमानत प्रभावी है और प्रधान को उपचुनाव की प्रक्रिया में भाग लेने की अनुमति है।

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