धार में लोकायुक्त की कार्रवाई: सहकारी समिति प्रबंधक की 2.41 करोड़ की संपत्ति उजागर

धार में लोकायुक्त की कार्रवाई: सहकारी समिति प्रबंधक की 2.41 करोड़ की संपत्ति उजागर

इंदौर। धार जिले में बुधवार तड़के लोकायुक्त ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए आदिम जाति सेवा सहकारी समिति के प्रबंधक शेरसिंह ठाकुर के 3 ठिकानों पर एक साथ छापा मारा। शुरुआती जांच में उनकी संपत्ति और घोषित आय के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। करीब 20 साल की नौकरी में ठाकुर को वेतन के रूप में 65 लाख रुपए मिले, जबकि इस अवधि में उन्होंने 2 करोड़ 41 लाख 45 हजार रुपए की संपत्ति अर्जित करने और खर्च करने की जानकारी मिली है। लोकायुक्त के प्रारंभिक आकलन में यह संपत्ति उनकी वैध आय से 271.46 प्रतिशत अधिक पाई गई है। इस खुलासे के बाद अब उनकी संपत्तियों के स्रोत और आर्थिक लेन-देन की पड़ताल की जा रही है।
लोकायुक्त ने शेरसिंह ठाकुर के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम, 2018 की धारा 13(1)(बी) और 13(2) के तहत मामला दर्ज किया है। बुधवार सुबह से ही लोकायुक्त की 3 टीमें सोडपुर, नालछा और मांडव स्थित उनके ठिकानों पर दस्तावेजों और संपत्तियों की जांच में जुटी हैं। कार्रवाई में मकान, जमीन, व्यावसायिक भवन, वाहन और कृषि उपकरणों की जानकारी जुटाई जा रही है।

97 लाख रुपए की लागत से बनाया दो मंजिला मकान
जांच में ठाकुर की अचल संपत्तियों का जो ब्योरा सामने आया है, उसमें सोडपुर का दो मंजिला मकान प्रमुख है। ग्राम सोडपुर, तहसील नालछा में उन्होंने 0.1520 हेक्टेयर का भूखंड खरीदा और उस पर करीब 2400 वर्गफीट क्षेत्र में दो मंजिला मकान बनवाया। भूखंड की कीमत और निर्माण लागत मिलाकर इस पर लगभग 97 लाख रुपए खर्च होने का अनुमान है।
इसके अलावा नालछा में मांडव रोड स्थित सोडपुर तिराहे पर 1350 वर्गफीट का एक अन्य भवन भी खरीदा गया है। इस भवन का इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। इसकी अनुमानित कीमत करीब 20 लाख रुपए बताई गई है। लोकायुक्त की टीम इन संपत्तियों के दस्तावेज और वास्तविक बाजार मूल्य का मिलान कर रही है।

पत्नी के नाम पर भी लाखों की कृषि भूमि
जांच का दायरा ठाकुर की पत्नी कविता के नाम दर्ज संपत्तियों तक भी पहुंचा है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, ग्राम सोडपुर, तहसील पीथमपुर में 0.645 हेक्टेयर कृषि भूमि 8 लाख रुपए में खरीदी गई। वहीं ग्राम मांडव, तहसील पीथमपुर में 2.526 हेक्टेयर जमीन के लिए करीब 42 लाख रुपए खर्च किए गए।
लोकायुक्त इन जमीनों की खरीद के समय, भुगतान के स्रोत और आय के साधनों की जानकारी जुटा रही है। यह भी जांच की जा रही है कि संपत्तियां किसकी वास्तविक कमाई से खरीदी गईं और इनके लिए धन कहां से आया।

53 लाख के वाहन और कृषि उपकरण
ठाकुर के यहां से महंगे वाहनों और मशीनों की जानकारी भी मिली है। लोकायुक्त के मुताबिक, उनके पास जेसीबी, महिंद्रा ट्रैक्टर, महिंद्रा टीयूवी, ऑल्टो कार और बुलेट मोटरसाइकिल के अलावा कई कृषि यंत्र और उपकरण हैं। इन सभी की अनुमानित कीमत करीब 53 लाख रुपए आंकी गई है।
जांच के दौरान ठाकुर से जुड़े एक अन्य भवन की जानकारी भी सामने आई है, जिसे बेनामी संपत्ति होने के संदेह में सत्यापित किया जा रहा है। अलग-अलग ठिकानों पर मिले ट्रैक्टर, ट्रॉलियों और कृषि उपकरणों के स्वामित्व संबंधी दस्तावेज भी खंगाले जा रहे हैं। इनकी वास्तविक कीमत का आकलन होने के बाद संपत्ति का कुल मूल्य और बढ़ सकता है।

संपत्तियों के वास्तविक मूल्य का आकलन होगा
लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक डॉ राजेश सहाय के नेतृत्व में यह कार्रवाई की जा रही है। अभियान में डीएसपी आनंद चौहान के साथ निरीक्षक आशुतोष मिठास, प्रतिभा तोमर और सचिन पटेरिया सहित पुलिसकर्मियों की टीमें शामिल हैं। कार्रवाई लोकायुक्त महानिदेशक योगेश देशमुख के निर्देश और डीआईजी मनोज सिंह के मार्गदर्शन में की जा रही है।
एसपी डॉ राजेश सहाय के अनुसार, तीनों ठिकानों पर तलाशी और दस्तावेजों की जांच जारी है। अभी सामने आए आंकड़े शुरुआती जांच पर आधारित हैं। सभी संपत्तियों का भौतिक सत्यापन, मूल्यांकन और उनसे जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल पूरी होने के बाद आय और खर्च का तुलनात्मक आकलन किया जाएगा। इसके बाद ही अनुपातहीन संपत्ति की वास्तविक राशि स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल करीब 65 लाख रुपए के वेतन के मुकाबले 2.41 करोड़ रुपए की संपत्ति का हिसाब लोकायुक्त के लिए जांच का सबसे अहम पहलू बना हुआ है।

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