शहीद दिलीप पुरी के नाम पर होगा बरमंडल स्कूल, CM ने पिता को दिया आश्वासन
धार। जिले के बरमंडल गांव के रहने वाले दिलीप पूरी ने देवास के खातेगांव के थाना प्रभारी पद पर कर्तव्य निभाते हुए जान गंवा दी। अब परिवार ने उनके अधूरे सपनों और समाज के प्रति योगदान को सम्मान देने की मांग की। शहीद के पिता ओमप्रकाश पुरी ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के सामने ऐसी मांगें रखी, जिनका उद्देश्य परिवार को बिखरने से बचाने के साथ ही दिलीप पुरी की स्मृति को स्थायी पहचान देना है। पिता चाहते हैं कि बरमंडल के जिस सरकारी स्कूल में उनके बेटे ने दो साल तक बिना वेतन बच्चों को पढ़ाया था, उस विद्यालय का नाम उनके बेटे के नाम पर रखा जाए। गांव में उनकी प्रतिमा स्थापित हो, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके बलिदान और शिक्षक के रूप में किए गए योगदान को याद रख सकें।
मंगलवार दोपहर मुख्यमंत्री ने दूरभाष पर शहीद के पिता ओमप्रकाश पुरी और पत्नी से बातचीत की। इस दौरान पिता ने परिवार की मौजूदा परिस्थितियों और बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए अपनी मांगें रखीं। इनमें सबसे प्रमुख मांग बहू की उप निरीक्षक के पद पर होने वाली नियुक्ति को इंदौर आईजी रेंज में ही रखने की है। उनका कहना है कि बहू की पदस्थापना इंदौर में रहने से पूरा परिवार एक साथ रह सकेगा। बेटी अरविंदो मेडिकल कॉलेज में अपनी पढ़ाई जारी रख पाएगी और बेटा भी इंदौर में रहकर शिक्षा हासिल कर सकेगा। बच्चों की देखभाल के लिए उनकी मां भी साथ रह सकेंगी।
बेटी और बेटे की शिक्षा का खर्च उठाने का भरोसा
ओमप्रकाश पुरी ने बेटी की अरविंदो मेडिकल कॉलेज की फीस और बेटे की पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए भी शासन से आर्थिक सहायता मांगी है। उनका कहना है कि बेटे के चले जाने के बाद परिवार पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा है। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई बीच में न रुके और उनका भविष्य प्रभावित न हो, इसके लिए सरकार की मदद जरूरी है।
पिता की एक अन्य मांग दिलीप पुरी के सामाजिक योगदान से जुड़ी है। उन्होंने मुख्यमंत्री को बताया कि उनके बेटे ने ग्राम बरमंडल स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में 2 साल तक शिक्षक के रूप में निशुल्क सेवाएं दी थीं। इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों को बिना कोई मानदेय लिए पढ़ाया। उनके इस योगदान को देखते हुए विद्यालय परिवार ने उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित भी किया था। अब पिता चाहते हैं कि उसी विद्यालय का नाम बदलकर ‘शहीद दिलीप पुरी शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय’ रखा जाए।
इसके साथ ही ओमप्रकाश पुरी ने बरमंडल गांव में बेटे की प्रतिमा स्थापित करने की मांग भी रखी है। उनका मानना है कि दिलीप पुरी ने पुलिस अधिकारी के रूप में कर्तव्य निभाते हुए प्राण गंवाए, लेकिन इससे पहले शिक्षक बनकर गांव के बच्चों का भविष्य संवारने में भी योगदान दिया था। इसलिए उनकी स्मृति को केवल एक शहीद के रूप में नहीं, बल्कि शिक्षा और सेवा से जुड़े व्यक्ति के रूप में भी संजोया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने परिवार की मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया है। उन्होंने कहा कि इस कठिन समय में प्रदेश सरकार परिवार के साथ है।

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