पौधरोपण की नई ‘रूट-शूट’ तकनीक का धार के वन मंडल में सफल प्रयोग, परिवहन और लॉजिस्टिक्स में सबसे बड़ा फायदा

पौधरोपण की नई ‘रूट-शूट’ तकनीक का धार के वन मंडल में सफल प्रयोग, परिवहन और लॉजिस्टिक्स में सबसे बड़ा फायदा

धार। जिला वन मंडल में सागौन पौधारोपण को अधिक प्रभावी, सुगम और किफायती बनाने के लिए वन विभाग एक बेहद आधुनिक और अनूठी तकनीक का उपयोग कर रहा है।   धार के जिला वन अधिकारी (डीएफओ) विजयानंथम टीआर ने इस आधुनिक तकनीक की कार्यप्रणाली और इसके दूरगामी फायदों को लेकर विस्तृत जानकारी साझा की है। ‘रूट-शूट’ तकनीक के नाम से जानी जाने वाली यह वैज्ञानिक विधि पारंपरिक पौधारोपण की तुलना में न केवल परिवहन लागत को भारी स्तर पर कम कर रही है,बल्कि दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाना भी अब इससे बेहद आसान हो गया है। आमतौर पर पौधारोपण के लिए नर्सरी में थैलियों (पॉलीबैग) में बड़े पौधे तैयार किए जाते हैं,जिन्हें ले जाना और रोपण काफी श्रमसाध्य होता है।
इसके विपरीत,रूट-शूट तकनीक पूरी तरह वैज्ञानिक और चरणबद्ध प्रक्रिया पर आधारित है। सबसे पहले जमीन पर विशेष तौर पर तैयार ‘मदर बेड’ में सागौन के पौधे विकसित किए जाते हैं। फिर पॉलीबैग में स्थानांतरण करीब तीन से चार महीने तक इन पौधों को मदर बेड में रखने के बाद इन्हें पॉलीबैग में जिस जगह पौधों को लगाना है वहां ले जाया जाता है।

रूट और शूट को तराश कर तैयार
जब रोपण का समय आता है,तब इन पौधों को मिट्टी से निकाल लिया जाता है। इसके बाद वैज्ञानिक तरीके से पौधे के जड़ (रूट) और तने (शूट) वाले मुख्य हिस्से को तराश कर (कटिंग कर) तैयार किया जाता है। मिट्टी हटाकर केवल इन प्रभावी हिस्सों के बंडल बना लिए जाते हैं,जो सीधे रोपण स्थल पर भेजे जाने के लिए तैयार होते हैं।
डीएफओ विजयानंथम टीआर के अनुसार,इस तकनीक का सबसे बड़ा क्रांतिकारी फायदा इसके परिवहन और लॉजिस्टिक्स में देखने को मिलता है। पारंपरिक रूप से थैलियों और मिट्टी समेत गाड़ी में पौधे लादने पर एक वाहन में मुश्किल से 3,000 पौधे ही आ पाते हैं। वहीं, रूट-शूट तकनीक से तैयार किए गए 30 से 40 हजार पौधे एक ही वाहन में बेहद आसानी से लोड किए जा सकते हैं।

बेहतर उत्तरजीविता
इस तकनीक को अपनाने से वन विभाग और सरकार को कई स्तरों पर लाभ मिल रहा है। एक ओर जहाँ वाहनों के फेरे कम होने से ईंधन और परिवहन लागत में बड़ी गिरावट आई है,वहीं दूसरी ओर कम समय में बहुत बड़े रकबे में पौधारोपण का काम पूरा किया जा रहा है। इससे सरकारी राजस्व की भारी बचत हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैज्ञानिक तरीके से तैयार रूट-शूट पौधे रोपे जाने के बाद तेजी से जड़ पकड़ते हैं और विपरीत मौसम में भी इनके जीवित रहने की संभावना (सर्वाइवल रेट) पारंपरिक पौधों की तुलना में काफी बेहतर होती है।

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