इंदौर पुलिस का कारनामा, साध्वी को ही दहेज प्रताड़ना का आरोपी बनाया, जिला कोर्ट ने राहत दी!

इंदौर पुलिस का कारनामा, साध्वी को ही दहेज प्रताड़ना का आरोपी बनाया, जिला कोर्ट ने राहत दी!

इंदौर। ​शहर में कानून और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने वाला एक अनोखा मामला सामने आया है। यहां एरोड्रम पुलिस ने एक ऐसे व्यक्ति की बहन को दहेज प्रताड़ना का आरोपी बना दिया, जिसने करीब 44 वर्ष पहले सांसारिक जीवन त्याग कर साध्वी का मार्ग चुन लिया था। इतना ही नहीं, महिला का अपने परिवार से दशकों से कोई संबंध नहीं था और वह शिकायतकर्ता की शादी में भी उपस्थित नहीं हुई थी। इसके बावजूद पुलिस ने गंभीरता से जांच किए बिना कोर्ट में चालान पेश कर दिया। हालांकि, जिला कोर्ट ने मामले का संज्ञान लेते हुए इस त्रुटिपूर्ण कार्रवाई को निरस्त कर दिया है।

शिकायतकर्ता से संबंध नहीं उन्हें भी आरोपी बनाया
​मामले की विस्तृत जानकारी के अनुसार, एक महिला ने इंदौर के एरोड्रम थाने में पति के साथ-साथ राजस्थान में रहने वाले जेठ, जेठानी और ननद के खिलाफ दहेज प्रताड़ना की शिकायत दर्ज कराई थी। परिजनों द्वारा पुलिस को स्पष्ट बताया गया था कि इन रिश्तेदारों का शिकायतकर्ता से कोई संपर्क नहीं रहा है। इसके बावजूद पुलिस ने चालान कोर्ट में पेश कर दिया, जिस पर प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत ने आरोप तय कर दिए थे।

जो विवाह में नहीं आए, उन्हें भी मामले में घसीटा
​इसके बाद बचाव पक्ष के अधिवक्ता महेंद्र मौर्य ने अपर सत्र न्यायालय में रिवीजन याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान कोर्ट को अवगत कराया गया कि आरोपी बनाई गई ननद ने वर्ष 1980 में बाल साध्वी के रूप में वैराग्य धारण कर लिया था। संन्यास लेने के पश्चात उसका अपने परिवार से कोई संबंध नहीं रहा और न वह शिकायतकर्ता के विवाह में सम्मिलित हुई थी। वहीं राजस्थान में निवास करने वाले जेठ और जेठानी भी विवाह समारोह में नहीं आए थे। इसके बावजूद पुलिस ने बिना किसी साक्ष्य और पड़ताल के सभी को अभियुक्त बना दिया।
​अपर सत्र न्यायाधीश मनीष लोवंशी की अदालत ने मामले के दस्तावेजों और रिकॉर्ड का गहन परीक्षण किया। कोर्ट ने पाया कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई भी ठोस प्रमाण उपलब्ध नहीं है जो यह दर्शाए कि साध्वी, जेठ या जेठानी ने शिकायतकर्ता को कब, कहां और कैसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया। अदालत ने माना कि निचली अदालत द्वारा बिना किसी स्पष्ट आधार के आरोप तय करने में भूल हुई है।

कोर्ट ने साध्वी, जेठ और जेठानी को राहत दी
​अपर सत्र न्यायालय ने निचली कोर्ट के आदेश को निरस्त करते हुए साध्वी, जेठ और जेठानी को बड़ी राहत दी है। इस फैसले के सामने आने के बाद कानूनी गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि दहेज प्रताड़ना जैसे संवेदनशील मामलों में पुलिस को शिकायत दर्ज करने और चालान पेश करने से पूर्व आरोपियों की वास्तविक भूमिका की गहनता से जांच करनी चाहिए।

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