दिवाली तक टला यूपीआई पर एमडीआर शुल्क लगाने का फैसला, नवंबर में नए नियमों पर निर्णय, तारीख तय नहीं!
नई दिल्ली। डिजिटल भुगतान के सबसे लोकप्रिय माध्यम यूपीआई पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) शुल्क लागू करने के प्रस्ताव को फिलहाल टाल दिया गया है। पहले यह व्यवस्था 15 अक्टूबर से लागू होने की चर्चा थी, लेकिन त्योहारी सीजन में बाजारों में बढ़ने वाली खरीदारी और व्यापारियों की आपत्तियों को देखते हुए इसे दिवाली के बाद तक आगे बढ़ाए जाने की जानकारी सामने आई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, नवंबर 2026 के दूसरे सप्ताह में इस संबंध में आगे का फैसला हो सकता है। हालांकि, शुल्क लागू करने की अंतिम तारीख और नियमों की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
दिवाली से पहले खरीदारी का दौर तेज होने के कारण यूपीआई भुगतान का इस्तेमाल भी बढ़ जाता है। किराना दुकानों, कपड़ा बाजारों, इलेक्ट्रॉनिक्स शोरूम, रेस्तरां और छोटे कारोबारियों से लेकर बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों तक में ग्राहक क्यूआर कोड स्कैन कर भुगतान करते हैं। ऐसे समय में डिजिटल लेनदेन पर अतिरिक्त शुल्क की व्यवस्था व्यापारियों की लागत और ग्राहकों के भुगतान व्यवहार को प्रभावित कर सकती है। इसी वजह से प्रस्तावित बदलाव को त्योहारी सीजन के बाद लागू करने की मांग उठने की बात कही गई है।
व्यापारियों को क्यों है चिंता?
व्यापारी संगठनों की प्रमुख चिंता यह है कि यूपीआई भुगतान पर शुल्क लगने से कारोबार की लागत बढ़ सकती है। खासकर उन दुकानदारों के लिए यह अतिरिक्त खर्च होगा, जहां ग्राहक बड़ी रकम का भुगतान डिजिटल माध्यम से करते हैं। दूसरी ओर, डिजिटल भुगतान कंपनियों और बैंकिंग तंत्र के लिए इस शुल्क को भुगतान सेवाओं के संचालन और तकनीकी ढांचे की लागत से जोड़कर देखा जा रहा है।
व्यापारियों को आशंका है कि अतिरिक्त लागत का दबाव अंततः वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर पड़ सकता है। हालांकि, प्रस्तावित व्यवस्था में ग्राहकों से सीधे यह शुल्क वसूलने का प्रावधान नहीं बताया गया है। इसलिए यह स्पष्ट करना जरूरी है कि एमडीआर मूल रूप से व्यापारी पर लगने वाला शुल्क है, न कि हर यूपीआई भुगतान करने वाले ग्राहक पर लगाया गया नया चार्ज।
नवंबर में लागू होने की संभावना, तारीख तय नहीं
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीए) की यूपीआई एवं सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी ने 13 अक्टूबर को त्योहारी सीजन को ध्यान में रखते हुए शुल्क लागू करने का फैसला आगे बढ़ाया। पहले इसके 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने की योजना थी। अब इसे दिवाली के तुरंत बाद लागू करने की बात कही गई है, नई तारीख अलग से घोषित की जाएगी।
अगले साल जनवरी तक टलने की संभावना
कुछ रिपोर्टों में तकनीकी तैयारियों और नियमों को लागू करने की प्रक्रिया के कारण जनवरी 2027 तक की संभावना भी जताई गई है। हालांकि, फिलहाल इसे अंतिम तारीख नहीं माना जा सकता। आधिकारिक रूप से घोषित नई तारीख और विस्तृत दिशानिर्देश सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि शुल्क किस दिन से और किन व्यापारियों पर लागू होगा।
कुल मिलाकर, दिवाली तक फैसले को टालने से व्यापारियों को त्योहारी खरीदारी के दौरान अस्थायी राहत मिलेगी। लेकिन इसके बाद यूपीआई भुगतान की लागत, छोटे कारोबारियों को मिलने वाली छूट और डिजिटल लेनदेन पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर तस्वीर नई अधिसूचना के बाद ही साफ होगी।

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