सीजेपी नेता सौरभ और आशुतोष को जेल भेजने पर अभिजीत दिपके का रिएक्शन, ‘गलती क्या है, जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराना?
नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने पार्टी के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को 5 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा ‘उनकी गलती क्या है? जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराना?’ दिपके ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आधिकारिक रूप से आपातकाल घोषित करने की हिम्मत दिखाने की बात कही। दादी के निधन के कारण वह इन दिनों महाराष्ट्र में अपने गांव गए हुए हैं।
मीडिया से बातचीत में दिपके ने ‘इंडिया’ ब्लॉक के साथ संबंधों पर कहा कि सभी का उद्देश्य एक है और वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लड़ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावों में धांधली हो रही है। दिपके ने स्पष्ट किया कि सीजेपी एक स्वतंत्र दबाव समूह है और आगे भी स्वतंत्र रूप से काम करेगी। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि पार्टी इंडिया ब्लॉक के खिलाफ है। उनके मुताबिक, दोनों का आंदोलन साझा उद्देश्य के लिए है।
जंतर-मंतर पर नारेबाजी के बाद कार्रवाई
सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया था। आरोप है कि सीजेपी के दोनों नेता समर्थकों के साथ बिना अनुमति निषेध क्षेत्र में पहुंचे और नारेबाजी करने लगे। इसके बाद पुलिस ने उन्हें एहतियातन हिरासत में ले लिया। 14 अक्टूबर को सौरव दास और आशुतोष रांका को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जहां से उन्हें 5 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। वहीं, अजिंक्य शिंदे से 5,000 रुपये का बॉन्ड भरवाया गया, जिसके तहत उन्हें एक साल तक शांति बनाए रखने की शर्त का पालन करना होगा।
पहले भी हिरासत में लिए गए थे नेता
इससे पहले 10 अक्टूबर को दिल्ली में सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान आशुतोष रांका, सौरव दास और अभिजीत दिपके को हिरासत में लिया गया था। एक साल तक शांति बनाए रखने का बॉन्ड भरने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया था। लेकिन 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर बिना अनुमति प्रवेश कर नारेबाजी करने के आरोप में फिर कार्रवाई हुई। जंतर-मंतर को हाल ही में प्रदर्शनों के लिए निर्धारित स्थलों की सूची से हटा दिया गया है। दिल्ली में अब धरना-प्रदर्शन के लिए 3 अन्य स्थान तय किए गए हैं।
एसआईआर के विरोध के बीच बढ़ा विवाद
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं के खिलाफ सीजेपी और अन्य संगठन लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ भी विरोध जताया जा रहा है। इसके मद्देनजर दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है। दिल्ली के पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने 11 अक्टूबर को आदेश जारी कर रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और सीबीडी मैदान को प्रदर्शनों के लिए निर्धारित स्थल घोषित किया था।
इसके बाद जंतर-मंतर को सूची से बाहर कर दिया गया। सीजेपी ने इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि प्रदर्शनों को राजधानी के राजनीतिक केंद्र से दूर करने से विरोध की आवाज कमजोर होगी। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर हुई कार्रवाई के बाद अब निर्धारित स्थलों और एसआईआर के विरोध को लेकर विवाद तेज हो गया है।

Leave a Reply