सुप्रीम कोर्ट का फैसला, संदिग्ध हालात में केवल गवाह की गवाही से वसीयत सिद्ध नहीं होती

सुप्रीम कोर्ट का फैसला, संदिग्ध हालात में केवल गवाह की गवाही से वसीयत सिद्ध नहीं होती

वसीयत का समर्थन करने वाले पक्ष को हर संदेह का संतोषजनक समाधान करना जरूरी

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी वसीयत के निष्पादन को लेकर संदिग्ध परिस्थितियां मौजूद हों, तो केवल गवाह की गवाही के आधार पर उसे वैध नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि ऐसी स्थिति में वसीयत का समर्थन करने वाले पक्ष पर यह अतिरिक्त जिम्मेदारी होती है कि वह सभी संदेहों का समाधान करते हुए अदालत को यह भरोसा दिलाए कि वसीयत वास्तव में वसीयतकर्ता की स्वतंत्र इच्छा और पूर्ण समझ-बूझ के साथ व्यक्त की गई अंतिम इच्छा थी।

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का फैसला निरस्त किया
जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस केवी विश्वनाथन की खंडपीठ ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले को निरस्त करते हुए वर्ष 1974 की पंजीकृत वसीयत को अमान्य घोषित कर दिया। अदालत ने पाया कि वसीयतकर्ता एक अशिक्षित किसान था, जो केवल अंगूठा लगाना जानता था। ऐसे में वसीयत से जुड़ी कई परिस्थितियां संदेह उत्पन्न करती थीं, जिनका संतोषजनक उत्तर प्रतिवादी नहीं दे सके।

संपत्ति विवाद से जुड़ा था मामला
यह मामला छज्जू राम की संपत्ति से संबंधित था। उनकी पत्नी भाम्बो देवी का कहना था कि उनके पति का निधन बिना किसी वसीयत के हुआ था, इसलिए वह उनकी एकमात्र क्लास-I उत्तराधिकारी हैं। दूसरी ओर प्रतिवादियों ने वर्ष 1974 में पंजीकृत वसीयत के आधार पर पूरी संपत्ति पर अपना अधिकार जताया।

अदालत ने गिनाईं संदेह पैदा करने वाले हालात
सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि वसीयत में पत्नी को पूरी तरह संपत्ति से वंचित कर दिया गया था, जबकि संपूर्ण संपत्ति ऐसे लोगों के नाम कर दी गई थी, जो निकट संबंधी भी नहीं थे। इतना ही नहीं, वसीयत में लाभार्थियों को भतीजा बताया गया, लेकिन इस संबंध का कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया। अदालत ने यह भी पाया कि दस्तावेज में बिना किसी प्रमाणीकरण के संशोधन किए गए थे। इन बदलावों ने वसीयत की प्रामाणिकता पर और अधिक संदेह खड़ा कर दिया।

केवल औपचारिक साक्ष्य पर्याप्त नहीं
खंडपीठ ने कहा कि जिन मामलों में वसीयत संदिग्ध परिस्थितियों से घिरी हो, वहां केवल हस्ताक्षर अथवा गवाह की गवाही के आधार पर उसे सिद्ध नहीं माना जा सकता। वसीयत का समर्थन करने वाले पक्ष को प्रत्येक संदेह का विश्वसनीय और संतोषजनक स्पष्टीकरण देना आवश्यक है। यदि वह ऐसा करने में असफल रहता है, तो वसीयत को वैध नहीं माना जा सकता।
इन्हीं आधारों पर सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का फैसला निरस्त करते हुए ट्रायल कोर्ट और प्रथम अपीलीय अदालत के निर्णय को बहाल कर दिया। इसके साथ ही अदालत ने भाम्बो देवी को विवादित संपत्ति का वैध मालिक घोषित कर दिया।

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