मानसून की चाल ने बढ़ाई चिंता, निर्धारित समय पर केरल नहीं पहुंचा मानसून!

मानसून की चाल ने बढ़ाई चिंता, निर्धारित समय पर केरल नहीं पहुंचा मानसून!

मौसम विभाग ने 2 से 3 दिन में मानसून की दस्तक की उम्मीद जताई

नई दिल्ली। देशभर में भीषण गर्मी के बीच मानसून के इंतजार में बैठे लोगों को अभी कुछ और दिन प्रतीक्षा करनी पड़ सकती है। दक्षिण-पश्चिम मानसून की केरल में एंट्री इस बार तय समय पर नहीं हो सकी है। सामान्य तौर पर मानसून 1 जून तक केरल पहुंच जाता है, लेकिन इस वर्ष उसके आगमन में देरी हो रही है। हालांकि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग का कहना है कि अगले 2 से 3 दिनों में मानसून केरल में प्रवेश कर सकता है।
मौसम विभाग के ताजा आकलन के अनुसार वर्तमान में वातावरणीय परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं। इसके चलते दक्षिण-पश्चिम मानसून के अरब सागर के कुछ हिस्सों, लक्षद्वीप द्वीप समूह, केरल के कई क्षेत्रों तथा तमिलनाडु की दिशा में आगे बढ़ने की संभावना मजबूत हो गई है। साथ ही पूर्व-मध्य और उत्तर-पूर्व बंगाल की खाड़ी सहित खाड़ी के शेष भागों में भी मानसून की प्रगति के लिए हालात अनुकूल बताए गए हैं।

मौसम के अनुमानों में बदलाव
मानसून को लेकर इस बार मौसम विभाग के अनुमानों में लगातार बदलाव देखने को मिला है। शुरुआत में अनुमान लगाया गया था कि मानसून सामान्य समय से पहले 26 मई को ही केरल पहुंच जाएगा। बाद में 29 मई को विभाग ने संशोधित जानकारी जारी कर कहा कि मानसून के आगमन में कुछ और दिन लग सकते हैं और यह अगले सप्ताह की शुरुआत में दस्तक देगा। अब विभाग का कहना है कि परिस्थितियां तेजी से अनुकूल हो रही हैं और जल्द ही मानसून आगे बढ़ सकता है।

कम बारिश होने की आशंका
इस बीच वर्षा को लेकर भी मौसम विभाग ने चिंता जताई है। विभाग के अनुसार इस वर्ष पूरे मौसम में देश में सामान्य से कम बारिश होने की आशंका है। अनुमान है कि कुल वर्षा दीर्घकालिक औसत का लगभग 90 प्रतिशत रह सकती है। दीर्घकालिक औसत का अर्थ किसी क्षेत्र में लंबे समय के दौरान दर्ज की गई औसत वर्षा से होता है, जिसके आधार पर मानसून की स्थिति का आकलन किया जाता है। मौसम विभाग ने कम वर्षा की आशंका के पीछे प्रशांत महासागर में बन रही परिस्थितियों को प्रमुख कारण बताया है।

अल-नीनो से मानसूनी हवाएं कमजोर
विभाग के अनुसार अल-नीनो की स्थिति उभरने के संकेत मिल रहे हैं। जब प्रशांत महासागर में अल-नीनो प्रभावी होता है, तब भारत पहुंचने वाली मानसूनी हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं। इसका असर वर्षा पर पड़ता है और कई क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश दर्ज होती है। खेती-किसानी और जल संसाधनों के लिहाज से मानसून की स्थिति बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में मानसून के आगमन में हो रही देरी और कम वर्षा की आशंका ने किसानों के साथ-साथ आम लोगों की चिंता भी बढ़ा दी है।

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