महाराष्ट्र के नए धर्मांतरण विरोधी कानून के तहत पहली एफआईआर दर्ज, पुणे में ब्रिटिश नागरिक पर मामला

कड़े प्रावधानों वाला कानून हाल ही में हुआ है अधिसूचित!

मुंबई। महाराष्ट्र में नए धर्मांतरण विरोधी कानून लागू होने के बाद इसके तहत पहला आपराधिक मामला सामने आया है। पुणे के खड़क पुलिस स्टेशन में एक ब्रिटिश नागरिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। आरोपी विदेशी धार्मिक नेता पर पुणे के गुरुवार पेठ स्थित एक चर्च में प्रवचन की आड़ में लोगों का धर्म बदलने की कोशिश करने का आरोप है। हिंदुत्ववादी संगठनों द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर पुलिस ने 9 अगस्त को यह मामला दर्ज किया है। यह कार्रवाई 7 अगस्त को हुई घटना के संदर्भ में की गई है।

विधानसभा और विधान परिषद में पारित हुआ विधेयक
राज्य में गैरकानूनी और छल-प्रपंच से कराए जाने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाने के मकसद से सत्तारूढ़ महायुति सरकार महाराष्ट्र धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 2026 (महाराष्ट्र धर्म रक्षा अधिनियम) लेकर आई थी। राज्य विधानसभा में देर रात तक चली तीखी बहस के बाद इस विधेयक को मंजूरी दी गई थी। दोनों सदनों से पास होने के बाद 30 जुलाई को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलते ही इसे अधिसूचित कर दिया गया, जिसके साथ ही यह विधेयक राज्य में नया कानून बन गया।

कड़े दंड और 60 दिन पूर्व नोटिस का प्रावधान
इस नए कानून में गैरकानूनी धर्मांतरण के खिलाफ बेहद सख्त सजा तय की गई है। सामान्य मामलों में अपराध साबित होने पर 7 साल तक की कैद और 1 से 5 लाख रुपये तक के जुर्माने की व्यवस्था है। वहीं यदि मामला किसी महिला, नाबालिग या अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के व्यक्ति से जुड़ा है, तो दोषी को 10 साल तक की जेल और 7 लाख रुपये तक का जुर्माना भुगतना पड़ सकता है।
कानून के नए नियमों के मुताबिक यदि कोई व्यक्ति अपनी मर्जी से भी धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे प्रक्रिया से कम से कम 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट को लिखित में इसकी पूर्व सूचना देनी होगी और बाद में अधिकारिक घोषणा भी करनी होगी। इसके अलावा अवैध या जबरन धर्मांतरण के मकसद से की गई शादियों को कानूनन निरस्त और अमान्य घोषित कर दिया जाएगा।

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