चौथी बार महंगा हुआ पेट्रोल-डीजल, क्या अभी और होगी बढ़ोतरी?

चौथी बार महंगा हुआ पेट्रोल-डीजल, क्या अभी और होगी बढ़ोतरी?

नई दिल्ली। देशभर में 25 मई 2026 को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिर बढ़ोतरी कर दी गई। पेट्रोल के दाम में 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 2.71 रुपये प्रति लीटर तक की वृद्धि हुई है। बीते 10 दिनों में यह चौथी बढ़ोतरी है। राजधानी नई दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है। अलग-अलग राज्यों में कर व्यवस्था के कारण कीमतों में अंतर बना हुआ है।

ईंधन की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि के पीछे सबसे बड़ी वजह 28 फरवरी 2026 से शुरू हुआ ईरान-अमेरिका संघर्ष माना जा रहा है। युद्ध के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया। पहले जहां ब्रेंट क्रूड 65 से 72 डॉलर प्रति बैरल के बीच था, वहीं संघर्ष के दौरान यह लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। फिलहाल इसकी कीमत करीब 97 डॉलर प्रति बैरल बनी हुई है।

होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से बढ़ी मुश्किल
युद्ध के दौरान ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ा। दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस आपूर्ति इसी समुद्री मार्ग से होती है। हालात ऐसे बने कि तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हो गई। एक तरफ ईरान बिना अनुमति गुजरने वाले जहाजों को निशाना बना रहा है, वहीं दूसरी ओर अमेरिकी नौसेना ने भी कुछ टैंकरों को रोका है।

इस संकट के कारण जहाजों का बीमा खर्च और माल ढुलाई लागत तेजी से बढ़ गई। इसका असर भारत समेत दक्षिण एशिया और पूर्वी एशिया के उन देशों पर पड़ा है, जो लंबे समय से पश्चिम एशिया से तेल आयात पर निर्भर हैं। भारत ने होर्मुज संकट के बाद अमेरिका और वेनेजुएला से तेल खरीद बढ़ाई, लेकिन लंबी दूरी के कारण परिवहन खर्च और आपूर्ति अवधि दोनों बढ़ गए।

आयात निर्भरता और कमजोर रुपये ने बढ़ाई परेशानी
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 से 90 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की खरीद डॉलर में होती है। ऐसे में डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी ने आयात लागत और बढ़ा दी है। वर्तमान में एक डॉलर की कीमत करीब 95 रुपये तक पहुंच गई है, जिसे रुपये की अब तक की सबसे कमजोर स्थिति माना जा रहा है।

तेल कंपनियों पर बढ़ा घाटे का बोझ
सरकारी तेल कंपनियों ने लंबे समय तक पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ाए। बताया जा रहा है कि चुनाव और महंगाई के दबाव को देखते हुए करीब 78 दिनों तक कीमतें स्थिर रखी गईं। इस दौरान कंपनियां महंगे दाम पर कच्चा तेल खरीदकर पुराने दामों पर बेचती रहीं, जिससे उन्हें प्रतिदिन लगभग 1,600 करोड़ रुपये तक का नुकसान हुआ।
रिपोर्ट के मुताबिक इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियों का कुल घाटा 1.2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो चुका है। अब कंपनियां उसी नुकसान की भरपाई के लिए चरणबद्ध तरीके से कीमतें बढ़ा रही हैं। हाल की बढ़ोतरी के बाद घाटा घटकर लगभग 750 करोड़ रुपये प्रतिदिन तक आने की बात कही जा रही है।

चुनाव खत्म होने के बाद शुरू हुई बढ़ोतरी
असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुदुचेरी विधानसभा चुनाव समाप्त होने के बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बदलाव शुरू हुआ। करीब 49 महीनों बाद पहली बार तेल के दाम बढ़ाए गए। इससे पहले लोकसभा चुनाव के दौरान पेट्रोल-डीजल के दाम 2 रुपये प्रति लीटर तक घटाए गए थे। भारत में आखिरी बार ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी वर्ष 2022 में हुई थी।

आगे क्या रह सकती है स्थिति
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता और होर्मुज जलडमरूमध्य सामान्य रूप से नहीं खुलता, तब तक तेल बाजार में दबाव बना रह सकता है। यदि कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं और रुपया कमजोर रहता है, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में और बढ़ोतरी से इनकार नहीं किया जा सकता।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

ज़रूर पढ़ें (Latest News)

Live TV LIVE STREAM