पर्यावरण मंत्रालय में बड़ी प्रशासनिक हलचल, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के तीन प्रमुख सहयोगी हटाए गए !

पर्यावरण मंत्रालय में बड़ी प्रशासनिक हलचल, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के तीन प्रमुख सहयोगी हटाए गए !

नई दिल्ली। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिला है। मंत्रालय ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के तीन प्रमुख सहयोगियों को तत्काल प्रभाव से उनके पदों से हटा दिया है। हटाने के इस औचक फैसले के बाद प्रशासनिक हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। इस पूरे घटनाक्रम की अंदरूनी रिपोर्ट ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ द्वारा सामने लाई गई है। मंत्रालय की ओर से 3 जुलाई को जारी तीन अलग-अलग आधिकारिक आदेशों के जरिए इन फैसलों की जानकारी दी गई। हालांकि, इस अचानक हुए बदलाव को लेकर जब मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उनकी तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी।

निजी सचिव अमर सिंह की मूल विभाग में वापसी
मंत्रालय द्वारा जारी किए गए पहले आदेश के अनुसार, पर्यावरण मंत्री के निजी सचिव (प्राइवेट सेक्रेटरी) के रूप में कार्यरत अमर सिंह को उनके पद से हटा दिया गया है। वर्ष 2010 बैच के भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस-आयकर) अधिकारी अमर सिंह को ‘प्रशासनिक आधार’ पर उनके मूल कैडर यानी राजस्व विभाग में वापस भेज दिया गया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि उन्हें तत्काल प्रभाव से उनके वर्तमान दायित्वों से कार्यमुक्त किया जाता है।
अमर सिंह को साल 2021 में उस समय भूपेंद्र यादव का निजी सचिव नियुक्त किया गया था, जब यादव श्रम एवं रोजगार मंत्रालय का कार्यभार संभाल रहे थे। शुरुआत में उप सचिव (डिप्टी सेक्रेटरी) के रूप में सेवाएं दे रहे अमर सिंह को वर्ष 2024 में पदोन्नत करके निदेशक (डायरेक्टर) बनाया गया था। डीओपीटी द्वारा 25 जून 2024 को जारी एक पिछले आदेश के तहत उनका कार्यकाल 7 सितंबर 2026 तक निर्धारित था, लेकिन उसमें यह शर्त भी शामिल थी कि मंत्री का कार्यकाल समाप्त होने या किसी अन्य नए आदेश के आने पर इसे समय से पहले भी खत्म किया जा सकता है।

दो अतिरिक्त निजी सचिवों पर गाज गिरी
निजी सचिव के साथ-साथ मंत्री के दो अतिरिक्त निजी सचिवों (एडिशनल प्राइवेट सेक्रेटरी) को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। दूसरे आदेश के मुताबिक, अतिरिक्त निजी सचिव शैलेश कुमार सिंह को उनकी निर्धारित अवधि पूरी होने से पहले ही मूल विभाग में लौटा दिया गया है। उन्हें ‘विस्तारित कूलिंग-ऑफ’ के प्रावधान के साथ वर्तमान जिम्मेदारियों से मुक्त करते हुए तुरंत अपने पैरेंट विभाग यानी कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) में रिपोर्ट करने के निर्देश दिए गए हैं।

अतिरिक्त निजी सचिव की सेवाएं समाप्त
इस क्रम में तीसरे आदेश के तहत एक अन्य अतिरिक्त निजी सचिव आयुष सरन की सेवाएं पूरी तरह समाप्त कर दी गई हैं। मंत्रालय के अवर सचिव विभूति पंजियार के हस्ताक्षर से जारी इस आदेश में बताया गया कि कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के 2 जुलाई 2026 के कार्यालय ज्ञापन और सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बाद आयुष सरन की नियुक्ति को तत्काल प्रभाव से निरस्त करते हुए उन्हें कार्यमुक्त कर दिया गया है। एक साथ तीन शीर्ष सहयोगियों पर हुई इस कार्रवाई ने मंत्रालय के भीतर प्रशासनिक समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है।

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