सेवानिवृत्ति से पहले इटारसी कॉलेज की प्राचार्य पर शिकंजा, 9 लाख की खेल सामग्री घोटाले में एफआईआर !

सेवानिवृत्ति से पहले इटारसी कॉलेज की प्राचार्य पर शिकंजा, 9 लाख की खेल सामग्री घोटाले में एफआईआर !

इटारसी। शासकीय गृह विज्ञान महाविद्यालय (होम साइंस कॉलेज) में खेल उपकरण और सामग्री की खरीदी में तकरीबन 9 लाख रुपये के हेरफेर का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. कामिनी जैन आगामी 30 जून को अपने पद से रिटायर होने वाली हैं, लेकिन अपनी सेवामुक्ति से महज 3 दिन पहले वे इस गंभीर कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ गई हैं। उनके खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कराने की कानूनी प्रक्रिया अमली जामा पहन चुकी है।
जानकारी के मुताबिक, कॉलेज प्रबंधन ने खेल सामग्री की डिलीवरी मिलने से पहले ही सप्लायर फर्म को लाखों रुपये की सरकारी राशि का भुगतान कर दिया था। इस वित्तीय गड़बड़ी का खुलासा तब हुआ जब स्थानीय विधायक डॉ. सीताशरण शर्मा ने कॉलेज का औचक निरीक्षण किया और खरीदी से जुड़े दस्तावेजों व प्रक्रिया पर कड़े सवाल खड़े किए। जब जिम्मेदार अधिकारियों को जांच की भनक लगी, तो आनन-फानन में सामान को कॉलेज कैंपस में डिलीवर कराने की कोशिश की गई, लेकिन तब तक प्रशासनिक अमला पूरी तरह मुस्तैद हो चुका था।

जांच में खुली परतें, कई चेहरे शक के घेरे में
इस संवेदनशील मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर सोमेश मिश्रा ने तत्काल उच्च स्तरीय जांच के आदेश जारी किए थे। आधिकारिक जांच रिपोर्ट में सिर्फ प्राचार्य ही नहीं, बल्कि कॉलेज के पूरे प्रशासनिक तंत्र की मिलीभगत की ओर इशारा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, खेल सामग्री की इस संदिग्ध खरीदी में प्रिंसिपल डॉ. कामिनी जैन के साथ-साथ स्टोर प्रभारी, फाइनेंस डिपार्टमेंट के हेड, अकाउंटेंट और स्पोर्ट्स ऑफिसर की भूमिका भी पूरी तरह संदिग्ध पाई गई है। जांच प्रतिवेदन के आधार पर कलेक्टर ने बिना किसी देरी के सभी आरोपियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने के सख्त निर्देश दिए।

पुलिस थाने पहुंचीं तहसीलदार, कॉलेज स्टाफ में हड़कंप
कलेक्टर के कड़े रुख के बाद शनिवार को नगर तहसीलदार सरिता मालवीय खुद विस्तृत जांच रिपोर्ट की फाइल लेकर कोतवाली थाने पहुंचीं। पुलिस प्रशासन ने इस सरकारी रिपोर्ट को संज्ञान में लेते हुए एफआईआर की कागजी कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि मुकदमा दर्ज होते ही मामले से जुड़े तमाम अधिकारियों को पूछताछ के लिए तलब किया जाएगा।
इधर, कॉलेज परिसर में इस कार्रवाई के बाद से भारी सन्नाटा और तनाव का माहौल है। स्टाफ और छात्र-छात्राओं के बीच यह चर्चा आम है कि आखिर बिना सामान की डिलीवरी लिए सरकारी खजाने से लाखों रुपये कैसे और किसके दबाव में रिलीज कर दिए गए। अब पुलिस की तफ्तीश से ही साफ हो पाएगा कि इस पूरे खेल के पीछे असली मास्टरमाइंड कौन है।

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