इंदौर में सियासी घमासान, कैलाश विजयवर्गीय की चिट्ठी से मची खलबली, मुख्यमंत्री का विशेष कार्यक्रम टला !

इंदौर में सियासी घमासान, कैलाश विजयवर्गीय की चिट्ठी से मची खलबली, मुख्यमंत्री का विशेष कार्यक्रम टला !

इंदौर। मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों इंदौर शहर चर्चा के केंद्र में आ गया है। कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को लिखे गए एक पत्र ने सूबे के सियासी गलियारों में भारी हलचल पैदा कर दी है। इस कथित ‘चिट्ठी बम’ के बाद पैदा हुए राजनीतिक तनाव के बीच मुख्यमंत्री का इंदौर केंद्रित एक बड़ा कार्यक्रम अचानक निरस्त कर दिया गया है, जिसे लेकर कयासों का दौर शुरू हो गया है।

डैमेज कंट्रोल की कोशिश या व्यस्तता, टला कार्यक्रम
इस पूरे घटनाक्रम के बीच मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से इंदौर के विकास को लेकर एक विशेष ताना-बाना बुना जा रहा था। आगामी 3 जुलाई को ‘मप्र की उम्मीदों का शहर इंदौर’ नाम से एक भव्य कार्यक्रम प्रपोज्ड था। राजनीतिक पंडितों का मानना था कि इस कार्यक्रम के जरिए मुख्यमंत्री विजयवर्गीय के आरोपों का जवाब देने और इंदौर के प्रति सरकार की गंभीरता दिखाने की कोशिश में थे। हालांकि, ऐन वक्त पर मुख्यमंत्री की व्यस्तता का हवाला देते हुए इस कार्यक्रम को कैंसिल कर दिया गया। अब राजनीतिक हलकों में इस बात की बारीकी से पड़ताल की जा रही है कि सांसद शंकर लालवानी के हवाले से होने वाले इस कार्यक्रम के निरस्त होने की असल वजह केवल व्यस्तता है या फिर इसके पीछे कोई गहरा सियासी कारण छिपा है।

भीतरखाने की नाराजगी और असहयोग के गंभीर आरोप
कैलाश विजयवर्गीय ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में अपनी गहरी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि पिछले करीब 2.5 वर्षों से उन्हें लगातार असहयोग, उपेक्षा और विरोध का सामना करना पड़ रहा है। शासन के इस रवैए से वे बेहद आहत महसूस कर रहे हैं। हालांकि, जब यह पत्र लीक होकर मीडिया और पब्लिक डोमेन में आया, तो विजयवर्गीय ने इस पर चुप्पी साध ली। उन्होंने मीडिया के सामने इस विषय पर बात करने से साफ इनकार कर दिया और कहा कि उन्हें ऐसे किसी पत्र की कोई जानकारी नहीं है।

विजयवर्गीय के समर्थन में उतरे दिग्विजय सिंह
इस अंदरूनी कलह का फायदा उठाने में विपक्ष ने भी देर नहीं की। कांग्रेस के सीनियर लीडर और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया पर खुलकर कैलाश विजयवर्गीय का पक्ष लिया। उन्होंने इंटरनेट मीडिया पर लिखा कि वे विजयवर्गीय के दर्द और पीड़ा को अच्छी तरह समझ रहे हैं। दिग्विजय सिंह ने विजयवर्गीय के प्रति अपनी सहानुभूति भी प्रकट की, जिससे बीजेपी के भीतर की यह रार और ज्यादा हाइलाइट हो गई है।

इंदौर की अनदेखी के वो बड़े मुद्दे, जिन पर गरमाई है राजनीति
नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अपने पत्र में केवल निजी उपेक्षा की बात नहीं की, बल्कि इंदौर के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण और गंभीर प्रोजेक्ट्स का भी जिक्र किया है। उन्होंने सरकार को चेतावनी भरे लहजे में बताया है कि शहर के मास्टर प्लान को लागू करने में जानबूझकर देरी की जा रही है। इसके अलावा मेट्रोपॉलिटन सिटी के प्रोजेक्ट में भी इंदौर का नाम पीछे धकेल दिया गया है। इंदौर एयरपोर्ट के विस्तार के लिए जरूरी जमीन उपलब्ध नहीं कराई जा रही है, जिससे विकास कार्य ठप है।
विजयवर्गीय ने यह मुद्दा भी उठाया कि राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में इंदौर की अनदेखी की जा रही है। साथ ही, पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है और आगामी सिंहस्थ के महत्वपूर्ण कार्यों में भी इंदौर को शामिल नहीं किया जा रहा है। इन तमाम मुद्दों ने अब मध्य प्रदेश की सियासत में एक नया मोड़ ला दिया है, और आने वाले दिनों में यह विवाद और बढ़ सकता है।

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