‘भाई के हत्यारों को फांसी दो, घर पर बुलडोजर चलाओ’, टीआई की बहन का फूटा गुस्सा!
जब पुलिसकर्मी ही सुरक्षित नहीं तो आम लोगों की रक्षा कौन करेगा; परिवार ने जताई साजिश के तहत हत्या की आशंका, सीबीआई जांच की मांग
धार। देवास जिले के खातेगांव थाना प्रभारी दिलीप पुरी की मौत ने उनके परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। शराब तस्करों को रोकने के दौरान ट्रक से कुचलकर हुई उनकी मौत को परिवार सामान्य हादसा मानने को तैयार नहीं है। बहन दीपिका गोस्वामी ने घटना में शामिल लोगों के लिए फांसी की सजा और उनके घर पर बुलडोजर चलाने की मांग करते हुए कहा कि भाई की हत्या करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए। उनका सवाल है कि जब वर्दी पहनकर कानून की रक्षा करने वाला पुलिस अधिकारी ही सुरक्षित नहीं है तो आम नागरिकों की सुरक्षा की उम्मीद कैसे की जा सकती है?
रविवार रात इंदौर-बैतूल हाईवे पर अवैध शराब की तस्करी रोकने पहुंचे खातेगांव टीआई दिलीप पुरी को ट्रक चालक ने कुचल दिया था। गंभीर रूप से घायल दिलीप को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने करीब 2 घंटे तक हृदय और सांस संबंधी प्रक्रिया बहाल करने के लिए सीपीआर दिया। चिकित्सकों की तमाम कोशिशों के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। सोमवार को धार जिले के उनके पैतृक गांव बरमंडल में जब तिरंगे में लिपटी पार्थिव देह पहुंची तो पूरा गांव शोक में डूब गया। परिवार के सदस्यों और ग्रामीणों का रो-रोकर बुरा हाल था। राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। इससे पहले खातेगांव थाने में उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम विदाई दी गई।
‘सिर्फ भाई की जान क्यों गई?’
भाई को खोने का दर्द बहन दीपिका गोस्वामी के शब्दों में साफ झलक रहा था। उन्होंने बताया कि परिवार में 3 बहनें और 2 भाई हैं। नवरात्र के दौरान दोनों भाई घर आए थे। दिलीप ने माता का पूजन किया और अगले ही दिन अपनी ड्यूटी पर लौट गए। परिवार को क्या पता था कि यह उनकी आखिरी मुलाकात साबित होगी। दीपिका ने घटना के तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसे महज हादसा बताकर मामले को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।
यदि यह सामान्य दुर्घटना थी तो आसपास मौजूद दूसरे लोगों को भी चोट लग सकती थी या किसी अन्य तरह का नुकसान हो सकता था, लेकिन इस घटना में केवल उनके भाई की जान गई। उन्होंने आशंका जताई कि इस पूरे मामले के पीछे शराब माफिया और अन्य लोगों की भूमिका हो सकती है। उनकी मांग है कि घटना में शामिल सभी लोगों की पहचान कर सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने साफ कहा कि भाई के हत्यारों को फांसी की सजा मिले और उनके घर पर बुलडोजर चलाया जाए।
‘दिलीप के बच्चों का भविष्य कौन संभालेगा?’
दीपिका ने भाई के परिवार की चिंता जताते हुए सरकार से आर्थिक सहायता की मांग भी की। उन्होंने बताया कि दिलीप के 2 बच्चे हैं। बेटी की उम्र करीब 17-18 साल और बेटे की उम्र 7-8 साल है। पिता की असमय मौत के बाद अब उनकी पढ़ाई, परवरिश और भविष्य की जिम्मेदारी कौन उठाएगा? उन्होंने सरकार से दोनों बच्चों की शिक्षा और पालन-पोषण के लिए आर्थिक मदद देने की मांग की। साथ ही दिलीप की पत्नी को सरकारी नौकरी या उचित पद देने की मांग करते हुए कहा कि इससे वह बच्चों का भविष्य सुरक्षित कर सकेगी।
दीपिका ने पुलिस व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि दिलीप पुलिस विभाग में थे और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी निभा रहे थे। इसके बावजूद उनकी जान चली गई। जब पुलिसकर्मी ही अपराधियों के सामने सुरक्षित नहीं हैं तो आम नागरिकों और उनके परिवारों की सुरक्षा की गारंटी कौन देगा?
दिलीप पुरी की मौत के बाद अब परिवार के सामने एक ओर न्याय की लड़ाई है तो दूसरी ओर दो बच्चों के भविष्य की चिंता। पैतृक गांव में पसरा मातम और परिजनों के सवाल इस घटना की गंभीरता को बयां कर रहे हैं। परिवार चाहता है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो, घटना के पीछे यदि कोई साजिश है तो उसका पर्दाफाश किया जाए और दोषियों को ऐसी सजा मिले, जिससे भविष्य में किसी पुलिसकर्मी पर इस तरह हमला करने की हिम्मत न हो।

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