महाराष्ट्र में 2.07 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, SIR पर निर्मला सीतारमण का बयान
नई दिल्ली। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी राजनीतिक टकराव के बीच केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विपक्षी दलों से कहा है कि उन्हें शिकायत है तो वे अदालत का रुख कर अपना पक्ष रख सकते हैं। उन्होंने कहा कि SIR से जुड़ी शिकायतों पर देशभर की अदालतों, यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट ने भी संज्ञान लिया है।
SIR के विरोध में विपक्षी दलों के प्रदर्शनों और मुख्य निर्वाचन अधिकारी से कार्रवाई की मांग को लेकर पूछे गए सवाल पर सीतारमण ने कहा कि लोग अदालती कार्यवाही में हिस्सा लेकर न्याय की मांग कर सकते हैं। कई लोग ऐसा कर भी रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष राजनीतिक प्रदर्शनों के जरिए अपना विरोध जताने के लिए स्वतंत्र है।
महाराष्ट्र में 21.14% मतदाताओं के नाम हटाए
महाराष्ट्र में SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मसौदा सूची से हटाए जाने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सोमवार को अदालत ने याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताते हुए केंद्र सरकार, निर्वाचन आयोग और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए। मामले की अगली सुनवाई 5 नवंबर को होगी।
याचिका के मुताबिक, महाराष्ट्र में कुल 9,78,54,049 पंजीकृत मतदाताओं में से 2,06,88,487 के नाम मसौदा मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। यह संख्या कुल मतदाताओं का करीब 21.14% है। महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार, सत्यापन के दौरान ये मतदाता अपने दर्ज पते पर नहीं मिले थे।
मुंबई-पुणे में पुनर्विकास बना नाम कटने की वजह
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार ने अदालत को बताया कि मुंबई और पुणे में पुनर्विकास कार्यों के कारण कई लोग अस्थायी रूप से दूसरी जगह रहने चले गए थे। पुराने पते पर नहीं मिलने के चलते ऐसे मतदाताओं के नाम भी सूची से हटा दिए गए। याचिका में यह दावा भी किया गया है कि करीब 1.22 करोड़ अन्य मतदाताओं के नाम कथित तौर पर ‘तार्किक विसंगतियों’ के आधार पर हटाए गए हैं।
SIR रोकने और पुराने मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखने की मांग
चार्टर्ड अकाउंटेंट और पत्रकार अरुण आनंदगिरि ने महाराष्ट्र में SIR प्रक्रिया को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इसमें मांग की गई है कि मामले में अंतिम फैसला आने तक राज्य में पुनरीक्षण प्रक्रिया रोक दी जाए। साथ ही, पुनरीक्षण से पहले की मतदाता सूची में दर्ज लोगों के नाम अदालत के फैसले तक नहीं हटाए जाएं।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली 3 सदस्यीय पीठ ने याचिका पर केंद्र सरकार, निर्वाचन आयोग और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल हैं।

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