UPI New Rules: 15 अक्टूबर से ₹2,000 से ज्यादा पेमेंट पर कितना लगेगा चार्ज?

UPI New Rules 2026 15 October ₹2000 से ज्यादा पेमेंट पर MDR

नई दिल्ली। डिजिटल भुगतान को और अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) और वित्त मंत्रालय ने यूपीआई लेन-देन के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आम ग्राहकों को अपनी जेब से कोई अतिरिक्त पैसा नहीं देना पड़ेगा। इसके अलावा महीने में 1 लाख रुपये तक का डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले छोटे व्यापारियों को भी इस शुल्क से पूरी तरह बाहर रखा गया है। सरकार का अनुमान है कि इस नए कदम से लगभग 95% छोटे लेन-देन पर किसी तरह का विपरीत असर नहीं पड़ेगा।

जरूरी सेवाओं पर सिर्फ 5 रुपये का तय शुल्क
कम मार्जिन वाले कारोबार और सार्वजनिक सेवाओं को राहत देने के लिए सरकार ने विशेष श्रेणी तैयार की है। रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, पेट्रोल-डीजल और कृषि से जुड़े सामानों की खरीदारी पर यदि 2,000 रुपये से अधिक का भुगतान किया जाता है, तो उस पर केवल 5 रुपये का फ्लैट मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगेगा। इन श्रेणियों का कुल मर्चेंट भुगतान में करीब 17% हिस्सा और मूल्य के हिसाब से 46% हिस्सा है, इसलिए यहां लागत कम रखना बेहद जरूरी समझा गया। वहीं म्यूचुअल फंड, शेयर बाजार और ब्रोकर को किए जाने वाले भुगतान पर बेहद मामूली 0.02% का शुल्क तय किया गया है, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये रहेगी।

बड़े व्यापारिक लेन-देन पर लगेगा 0.4% चार्ज
अन्य बड़े व्यावसायिक लेन-देन के मामलों में 2,000 रुपये से ऊपर के भुगतान पर 0.4% एमडीआर वसूला जाएगा। हालांकि, बड़े व्यापारियों को राहत देने के लिए 75,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर अधिकतम चार्ज की सीमा 300 रुपये प्रति लेन-देन तय कर दी गई है। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर से प्रभावी होगी। सरकार ने साफ किया है कि बैंकों और ऐप्स की तरफ से तय की गई 1 से 5 लाख रुपये तक की दैनिक सीमा सिर्फ सुरक्षा और जोखिम नियंत्रण के लिए है, इसका मकसद शुल्क वसूलना नहीं है।

ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा सीधा बोझ
वित्त मंत्रालय ने बैंकों को सख्त सलाह दी है कि व्यापारी इस शुल्क का बोझ ग्राहकों पर न डालें। इसके साथ ही यूपीआई ऐप चलाने वाली कंपनियों पर किसी भी तरह का छिपा हुआ चार्ज या प्लेटफॉर्म फीस लगाने पर रोक लगा दी गई है। आम उपयोगकर्ताओं के लिए मुफ्त लेन-देन पर कोई मासिक सीमा या कोटा लागू नहीं होगा। हालांकि, क्रेडिट और डेबिट कार्ड की तरह व्यापारी इस शुल्क को ग्राहकों से वसूलते हैं या नहीं, इस पर सरकार केवल सलाह जारी कर सकी है। इसके बावजूद एनपीसीआई का दावा है कि नया ढांचा लागू होने के बाद भी यूपीआई अन्य डिजिटल माध्यमों की तुलना में काफी सस्ता बना रहेगा।

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