बंगाल में जीत का अंतर छोटा, हजारों वोटर हटे, सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि क्या नए चुनाव का आदेश दे सकते हैं!

बंगाल में जीत का अंतर छोटा, हजारों वोटर हटे, सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि क्या नए चुनाव का आदेश दे सकते हैं!

31 विधानसभा सीटों का ब्योरा पेश, कोर्ट ने पूछा- प्रभावित उम्मीदवारों ने चुनाव याचिका दायर की या नहीं?

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान मंगलवार को चुनाव नतीजों पर इसके संभावित असर का मुद्दा उठा। अदालत ने सवाल किया कि अगर किसी विधानसभा सीट पर जीत का अंतर हटाए गए मतदाताओं की संख्या से कम है, तो क्या न्यायपालिका नए चुनाव कराने का आदेश दे सकती है?
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ तृणमूल कांग्रेस के एक सदस्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बंदोपाध्याय की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। बंदोपाध्याय ने अदालत के सामने 31 विधानसभा क्षेत्रों का विवरण रखा। उनका दावा था कि इन सीटों पर भाजपा उम्मीदवारों की जीत का अंतर SIR के दौरान हटाए गए मतदाताओं की संख्या से कम रहा।

401 वोट से जीत, 8,785 मतदाताओं के नाम हटे
याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि AC-145 में जीत का अंतर महज 401 वोट था, जबकि SIR प्रक्रिया के दौरान 8,785 मतदाताओं के नाम हटा दिए गए। इसी तरह एक अन्य सीट पर हार का अंतर 316 वोट बताया गया, जबकि वहां भी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटे। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि इतनी बड़ी संख्या में नाम हटने से चुनाव परिणाम प्रभावित हो सकते हैं। उनका आरोप है कि बड़ी संख्या में वास्तविक नागरिक मतदान के अधिकार से वंचित हुए हैं। इसी आधार पर उन्होंने चुनाव परिणामों पर सवाल उठाया।

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- चुनाव याचिका दायर हुई?
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने पूछा कि क्या इन 31 विधानसभा क्षेत्रों के प्रभावित उम्मीदवारों ने विजयी उम्मीदवारों के निर्वाचन को चुनौती देने के लिए औपचारिक चुनाव याचिकाएं दायर की हैं। इस पर बताया गया कि कुछ सीटों पर चुनाव याचिकाएं दाखिल की गई हैं, लेकिन सभी 31 सीटों पर ऐसा नहीं हुआ है।
जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने इस मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू उठाया। उन्होंने कहा कि यह भी देखना होगा कि जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए, उनमें से कितने लोगों ने इसके खिलाफ अपील की। कोर्ट ने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि 100 नाम हटाए गए हों, जीत का अंतर 50 वोट हो और उनमें से 60-70 लोगों ने अपील की हो, तो मामला काफी ठोस बन सकता है। लेकिन यदि नाम हटाए जाने के बावजूद संबंधित लोगों ने इसे स्वीकार कर लिया और कोई अपील नहीं की, तो केवल नाम हटने के आधार पर चुनाव परिणाम को चुनौती देना सैद्धांतिक सवाल ही रह जाएगा।

जांच का दायरा 31 सीटों से आगे
सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि मामले की पड़ताल केवल बताई गई 31 विधानसभा सीटों तक सीमित नहीं रहेगी। पीठ पश्चिम बंगाल में अपीलीय न्यायाधिकरण के सामने लंबित सभी मामलों को भी देखना चाहती है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इन मामलों का समय पर निपटारा हो। सुनवाई के दौरान अदालत के सवालों से साफ है कि मतदाता सूची में हुए बदलाव और चुनाव परिणामों के बीच संबंध को केवल हटाए गए नामों की संख्या से तय नहीं किया जा सकता। यह भी देखना होगा कि कितने प्रभावित मतदाताओं ने अपने नाम हटाए जाने के खिलाफ अपील की और किन सीटों पर चुनाव परिणाम को कानूनी चुनौती दी गई है।

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