बच्चों के बीमार होने के बाद शिशुकुंज स्कूल पर सख्ती, 5 खाद्य नमूने फेल, 14 दिन में सुधार के निर्देश

बच्चों के बीमार होने के बाद शिशुकुंज स्कूल पर सख्ती, 5 खाद्य नमूने फेल, 14 दिन में सुधार के निर्देश

इंदौर। खाद्य सुरक्षा विभाग ने शिशुकुंज स्कूल की मेस के निरीक्षण के दौरान 22 जून को कुल 23 खाद्य नमूने लिए थे। इनमें से ड्रिंकिंग वाटर, सोयाबीन तेल, ब्रियो नमकीन, तुअर दाल और अमूल स्ट्रॉबेरी आइसक्रीम सहित 5 नमूने निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे। इन नमूनों के फेल होने के आधार पर संबंधित वैधानिक कार्रवाई भी शुरू कर दी गई। खाद्य सुरक्षा प्रशासन ने संस्थान को 14 दिनों के भीतर सभी कमियों को दूर कर आवश्यक दस्तावेजों सहित अनुपालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित समय सीमा में संतोषजनक सुधार नहीं होने पर संस्थान के लाइसेंस अथवा पंजीयन को निलंबित करने सहित अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
शिशुकुंज स्कूल में भोजन करने के बाद करीब सवा सौ बच्चों के बीमार पड़ने की घटना के बाद जिला प्रशासन ने शहर के कई स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों की मेस तथा कैंटीनों की जांच की। बायपास रोड स्थित झलारिया की शिशुकुंज एजुकेशनल सोसायटी का निरीक्षण किया गया, जिसमें खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता मानकों से जुड़ी कई गंभीर खामियां सामने आईं। इसके बाद संस्थान को खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 32 के तहत सुधार सूचना पत्र (इंप्रूवमेंट नोटिस) जारी किया गया है।
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने 22 जून 2026 को किए गए निरीक्षण में पाया कि भोजन तैयार करने वाले क्षेत्र की खिड़कियां सुरक्षित तरीके से ढकी नहीं थीं, जिससे कीट-पतंगों के प्रवेश की संभावना बनी हुई थी। रॉ मैटेरियल का भंडारण भी व्यवस्थित नहीं मिला। जांच के दौरान एक्सपायरी खाद्य सामग्री भी संग्रहित पाई गई, जिससे एफआईएफओ (पहले आया, पहले उपयोग) और एफईएफओ (जिसकी अवधि पहले समाप्त होगी, उसका पहले उपयोग) प्रणाली के पालन में गंभीर लापरवाही सामने आई। निरीक्षण के दौरान खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता संबंधी जांच रिपोर्ट भी उपलब्ध नहीं कराई जा सकी। अधिकारियों ने यह भी पाया कि भोजन तैयार करने में कुछ स्थानों पर फूड ग्रेड सामग्री के बजाय एल्युमीनियम के बर्तनों का उपयोग किया जा रहा था।
जांच के दौरान किचन में इस्तेमाल किया हुआ कुकिंग ऑयल भी रखा मिला। डीप फ्रीजर में तापमान नियंत्रण और डिस्प्ले सिस्टम नहीं था। भोजन तैयार करने वाले कर्मचारी केवल कैप पहने हुए थे, जबकि एप्रन और ग्लव्स का उपयोग नहीं कर रहे थे। निर्माण कार्य में उपयोग किए जा रहे पानी की एनएबीएल मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से प्रमाणित नवीनतम जांच रिपोर्ट भी उपलब्ध नहीं थी। इसके अलावा पेस्ट कंट्रोल से संबंधित अभिलेख भी अधूरे पाए गए।

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