10 हजार से ज्यादा ट्रांसफर पर लगेगा ब्रेक, साइबर ठगी रोकने के लिए RBI की नई तैयारी!

10 हजार से ज्यादा ट्रांसफर पर लगेगा ब्रेक, साइबर ठगी रोकने के लिए RBI की नई तैयारी!

नई दिल्ली। डिजिटल भुगतान के बढ़ते दौर में साइबर ठगी के मामलों पर लगाम कसने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) एक बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। प्रस्तावित नियमों के मुताबिक, यदि कोई व्यक्ति 10 हजार रुपये से अधिक की रकम ऑनलाइन ट्रांसफर करता है, तो उस राशि को प्राप्तकर्ता तक पहुंचने में करीब एक घंटे का समय लग सकता है।
यह कदम उन बढ़ते मामलों को ध्यान में रखकर उठाया जा रहा है, जिनमें लोग धोखाधड़ी का शिकार होकर जल्दबाजी में बड़ी रकम ट्रांसफर कर देते हैं। वर्ष 2025 में डिजिटल ठगी से होने वाला नुकसान 22 हजार करोड़ रुपये से अधिक दर्ज किया गया है, जिसने नियामक संस्थाओं की चिंता बढ़ा दी है। इसी के मद्देनजर यह नई व्यवस्था विचाराधीन है, जिस पर 8 मई 2026 तक सुझाव आमंत्रित किए गए हैं।

अब रकम तत्काल खाते में नहीं आएगी
इस प्रस्ताव के तहत एक घंटे का ‘कूलिंग पीरियड’ लागू करने की योजना है। यानी जब भी 10 हजार रुपये से ज्यादा की रकम UPI या IMPS के जरिए भेजी जाएगी, तो वह तुरंत खाते में नहीं पहुंचेगी, बल्कि कुछ समय तक रोकी जाएगी। इस दौरान भेजने वाले के पास यह मौका रहेगा कि अगर उसे किसी तरह की शंका हो तो वह ट्रांजेक्शन रद्द कर सके।
रिजर्व बैंक का मानना है कि आजकल ज्यादातर साइबर ठगी तकनीकी खामियों से नहीं, बल्कि लोगों को भ्रमित कर या डराकर की जाती है। ऐसे में यह एक घंटे का अंतराल लोगों को सोचने और फैसला बदलने का अवसर देगा।

सीनियर सिटीजन के लिए अलग प्रावधान पर विचार
प्रस्ताव में वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भी खास प्रावधान सुझाए गए हैं। 70 वर्ष से अधिक आयु के लोगों के लिए 50 हजार रुपये से ऊपर के ट्रांसफर पर किसी विश्वसनीय व्यक्ति की अनुमति अनिवार्य करने पर विचार हो रहा है। इसके अलावा, यदि किसी व्यक्तिगत या छोटे कारोबारी खाते में 25 लाख रुपये से ज्यादा की राशि जमा होती है, तो उसे खाते में डालने से पहले बैंक द्वारा पुष्टि की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

पेमेंट कर रोका भी जा सकेगा
एक और अहम पहलू ‘किल स्विच’ का है, जिस पर भी विचार किया जा रहा है। इसके जरिए ग्राहक जरूरत पड़ने पर एक ही बार में अपने सभी डिजिटल भुगतान माध्यम जैसे यूपीआई, कार्ड या इंटरनेट बैंकिंग अस्थायी रूप से बंद कर सकेगा। इस प्रस्ताव के साथ कुछ व्यावहारिक चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। तत्काल भुगतान की सुविधा के आदी हो चुके लोगों के लिए यह बदलाव असहज हो सकता है, वहीं व्यापारिक लेन-देन में देरी की आशंका भी जताई जा रही है। इसके बावजूद, सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए इस तरह की व्यवस्था को जरूरी कदम माना जा रहा है।

सभी पर लागू नहीं होगा यह नियम
रिजर्व बैंक ने यह भी संकेत दिए हैं कि हर लेन-देन पर यह नियम लागू नहीं होगा। जिन लोगों को ग्राहक पहले से विश्वसनीय सूची में जोड़ देगा, उन्हें पैसे भेजने में किसी प्रकार की देरी नहीं होगी। इसके अलावा दुकानों पर भुगतान, स्वचालित भुगतान व्यवस्था और अन्य निर्धारित माध्यमों को इस दायरे से बाहर रखा जा सकता है। कुल मिलाकर, डिजिटल लेन-देन को सुरक्षित बनाने की दिशा में यह प्रस्ताव एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, जो लोगों को जल्दबाजी में होने वाली ठगी से बचाने में मदद कर सकता है।

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