विदिशा। केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के संसदीय क्षेत्र विदिशा में बेतवा नदी पर बने स्टॉप डैम के खंभों से छलांग लगाकर स्कूल जाने वाले बच्चों का मामला अब और गहरा गया है। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी इस पूरे वाकये पर स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए 2 सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
दरअसल, ककरुआ और आसपास के गांवों के बच्चों को पढ़ाई के लिए शासकीय हाई स्कूल पलोह जाना पड़ता था। पक्के सड़क मार्ग से यह दूरी लगभग 15 किलोमीटर बैठती थी, जिसे घटाकर महज 1.5 किलोमीटर करने के लिए बच्चे बेतवा नदी के स्टॉप डैम के खंभों पर जान जोखिम में डालकर छलांग लगाते थे। इस खतरनाक सफर का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर वायरल होते ही हड़कंप मच गया। आयोग ने संविधान के अनुच्छेद 21-ए, शिक्षा का अधिकार कानून 2009 और सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों का हवाला देते हुए साफ किया है कि बच्चों को सुरक्षित माहौल में स्कूल पहुंचाना राज्य सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
प्रशासन ने तत्काल कदम उठाए, स्कूल बना हाईस्कूल
मामला उजागर होते ही प्रशासन ने आनन-फानन में कार्रवाई शुरू की। स्टॉप डैम वाले जोखिम भरे रास्ते को बंद करके महज 3 दिन के भीतर बंधेरा के स्थानीय स्कूल को उच्चीकृत कर हाई स्कूल में बदल दिया गया, जिससे बच्चों को दूर न जाना पड़े। लोक निर्माण विभाग (ब्रिज) के कार्यपालन यंत्री एआर मोरे के मुताबिक, तात्कालिक राहत के तौर पर स्टॉप डैम के खुले हिस्सों पर लोहे की जालियां बिछा दी गई हैं।
इसके साथ ही पलोह और ककरुआ गांवों के बीच बेतवा नदी पर एक स्थायी पुल बनाने का प्रस्ताव तैयार कर राज्य सरकार को भेजा जा रहा है।
दूसरी ओर, प्रशासनिक स्तर पर हुई ढिलाई को लेकर भी शिकंजा कसा गया है। जिला पंचायत ने समय पर इस संवेदनशील जानकारी को वरिष्ठ अधिकारियों तक न पहुंचाने को बेहद गंभीर माना है। इस लापरवाही के चलते जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) के साथ-साथ ग्राम पंचायत मुंडरा हरिसिंह के सरपंच और सचिव को नोटिस थमाकर जवाब तलब किया गया है।