कोलकाता। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर जारी सियासी संकट के बीच बागी गुट ने बड़ा कदम उठाते हुए वरिष्ठ विधायक अरूप रॉय को अपना अध्यक्ष घोषित कर दिया। विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में आयोजित विशेष सत्र में यह फैसला सर्वसम्मति से लिया गया। साथ ही बागी गुट ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को मुख्य सलाहकार के रूप में उनके साथ जुड़ने का प्रस्ताव भी दिया।
विशेष सत्र के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि यह असली या नकली टीएमसी का सवाल नहीं है, बल्कि उनका गुट ही वास्तविक तृणमूल कांग्रेस है। उन्होंने बताया कि पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास, विधायक फिरहाद हकीम, रथिन घोष और सबीना यास्मीन को बागी गुट का उपाध्यक्ष बनाया गया है। उन्होंने कहा कि यदि ममता बनर्जी मुख्य सलाहकार की भूमिका स्वीकार करना चाहें तो उनका स्वागत किया जाएगा।
विशेष सत्र नियमों के अनुरूप
ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया कि विशेष सत्र पार्टी के संविधान और नियमों के अनुरूप बुलाया गया। उन्होंने कहा कि इस बैठक की पूरी कार्यवाही निर्वाचन आयोग को भेजी जाएगी और पार्टी की वैधता पर अंतिम निर्णय आयोग ही करेगा। उन्होंने यह भी बताया कि नया नेतृत्व जल्द ही जिला समितियों, प्रदेश इकाई और प्रवक्ताओं के पैनल का गठन कर संगठन को मजबूत करने की प्रक्रिया शुरू करेगा।
आंतरिक मतभेद लगातार बढे
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी की हार के बाद पार्टी में आंतरिक मतभेद लगातार बढ़ते गए। कुछ दिन पहले पार्टी के 80 में से 58 विधायकों ने विपक्ष के नेता पद के लिए ऋतब्रत बनर्जी के दावे का समर्थन किया था और केंद्रीय नेतृत्व की पसंद को अस्वीकार कर दिया था। बागी गुट का कहना है कि उसके समर्थन में विधायकों की संख्या अब पहले से अधिक हो चुकी है।
इस बीच पार्टी को संसद में भी बड़ा झटका लगा। बागी गुट का दावा है कि टीएमसी के 28 में से 20 लोकसभा सांसद संसदीय दल से अलग होकर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में शामिल हो गए हैं। इन सांसदों ने भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए को समर्थन देने की भी घोषणा की है। टीएमसी के भीतर जारी इस घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा तेज कर दी है। अब सभी की नजर निर्वाचन आयोग के रुख और आगे होने वाले संगठनात्मक घटनाक्रम पर टिकी है।