15 अक्टूबर से यूपीआई पर एमडीआर शुल्क का विरोध, सीटीआई ने वित्त मंत्री को पत्र लिखा, फैसला 1 जनवरी 2027 तक टालने की मांग
नई दिल्ली। 2000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर 15 अक्टूबर से 0.40% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क लगाने के फैसले का चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने विरोध किया है। संगठन के चेयरमैन बृजेश गोयल ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर इसे वापस लेने की मांग की है।
सीटीआई महासचिव गुरमीत अरोड़ा और रमेश आहूजा ने कहा कि नवरात्रि, दिवाली, छठ पूजा, क्रिसमस और नए साल के दौरान यूपीआई से भुगतान बढ़ता है। ऐसे में शुल्क लगाने से व्यापारियों की लागत बढ़ेगी और ग्राहकों को भी परेशानी हो सकती है। छोटे दुकानदार पहले से ही महंगाई और कारोबार में सुस्ती से जूझ रहे हैं।
यूपीआई भुगतान के बहिष्कार की चेतावनी
बृजेश गोयल ने चेतावनी दी कि शुल्क लागू होने पर दिल्ली के व्यापारी यूपीआई भुगतान का बहिष्कार करने और दुकानों पर ‘केश ओनली’ के बोर्ड लगाने पर विचार कर सकते हैं। सीटीआई ने अपने सर्वे के हवाले से दावा किया कि इससे यूपीआई लेनदेन में 50% तक गिरावट आ सकती है और लोग नकद भुगतान की ओर लौट सकते हैं।
छोटे व्यापारियों को स्थायी छूट देने की मांग
सीटीआई ने सरकार से एमडीआर शुल्क तत्काल वापस लेने या इसे 1 जनवरी 2027 तक टालने की मांग की है। संगठन ने सालाना 40 लाख रुपये तक का कारोबार करने वाले छोटे व्यापारियों को इस शुल्क से स्थायी छूट देने की अपील भी की है। सीटीआई के मुताबिक, त्योहारी सीजन में यह शुल्क लागू करना व्यापार और डिजिटल भुगतान, दोनों के लिए नुकसानदेह हो सकता है।

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