SIR पर सुप्रीम कोर्ट का सवाल, पुराने वोटरों से Form-6 क्यों भरवा रहे?

SIR पर सुप्रीम कोर्ट का सवाल, पुराने वोटरों से Form-6 क्यों भरवा रहे?

नई दिल्ली। दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष ‘गहन पुनरीक्षण’ (एसआईआर) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से सवाल किया कि जिन लोगों के नाम पहले मतदाता सूची में दर्ज थे, लेकिन नई मसौदा सूची में नहीं आए, उनसे फॉर्म-6 क्यों भरवाया जा रहा है? यह फॉर्म मुख्य रूप से पहली बार मतदाता बनने वालों के पंजीकरण के लिए है। अदालत ने पूछा कि पुराने मतदाताओं को देर से ही सही, एन्यूमरेशन फॉर्म जमा करने का एक और मौका क्यों नहीं दिया जा सकता।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ बुधवार को इस मामले की सुनवाई कर रही थी। अंजलि भारद्वाज और अमृता जौहरी की याचिका में एसआईआर के दौरान मतदाताओं को जारी नोटिस में कथित पारदर्शिता की कमी का मुद्दा उठाया गया है।

पुराने मतदाताओं से फॉर्म-6 भरवाने पर सवाल
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि फॉर्म-6 पहली बार मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए है, जबकि फॉर्म-8 का इस्तेमाल नाम-पते में सुधार या निवास स्थान बदलने पर किया जाता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए पूछा कि यदि कोई व्यक्ति पहले वसंत कुंज में मतदाता था और बाद में सरिता विहार चला गया, तो वह अपने पुराने मतदान केंद्र, मतदाता सूची की जानकारी और मतदाता पहचान संख्या के आधार पर नए पते का विवरण दे सकता है। ऐसे में उससे फॉर्म-6 क्यों भरवाया जाए? न्यायमूर्ति बागची ने भी पहले से पंजीकृत मतदाता से यह फॉर्म भरवाने के तरीके पर सवाल उठाए।

देर से जवाब देने पर छिनेगा मतदान का अधिकार
न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि मतदान का अधिकार बेहद महत्वपूर्ण है। यदि कोई व्यक्ति लापरवाही या किसी अन्य कारण से समय पर जवाब नहीं दे पाया, तो क्या वह हमेशा के लिए वोट देने का अधिकार खो देगा? अदालत ने कहा कि किसी मतदाता के जवाब नहीं देने की कई वजहें हो सकती हैं। यदि उसका नाम मसौदा सूची में नहीं है और वह जरूरी दस्तावेज लेकर अधिकारियों के पास पहुंचता है, तो उससे नए पंजीकरण का फॉर्म भरवाना परेशानी पैदा कर सकता है। पीठ ने इसे प्रक्रिया में एक तरह की संरचनात्मक असंगति बताते हुए दूर करने की जरूरत जताई।

बाहर गए मतदाताओं को भी मिले अवसर
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली में कई मतदाता ऐसे हो सकते हैं, जिन तक एन्यूमरेशन फॉर्म नहीं पहुंचा। कुछ लोगों ने पता बदल लिया होगा, जबकि कुछ काम के सिलसिले में अस्थायी रूप से दिल्ली से बाहर गए होंगे। पीठ ने सवाल किया कि ऐसे लोगों को दोबारा एन्यूमरेशन फॉर्म जमा करने या पता बदलने की जानकारी देने के लिए फॉर्म-8 भरने का अवसर क्यों नहीं दिया जा सकता। अदालत के अनुसार, केवल दूसरी जगह जा चुके और अनुपस्थित मतदाताओं की श्रेणियां बनाना पर्याप्त नहीं है।

छूटे मतदाताओं के लिए अलग श्रेणी का सुझाव
अदालत ने सुझाव दिया कि जो मतदाता किसी कारण से एसआईआर के दौरान एन्यूमरेशन फॉर्म जमा नहीं कर पाए, उनके लिए अलग श्रेणी बनाई जा सकती है। इसे रेसिडुअल कैटेगरी यानी शेष मामलों की श्रेणी के रूप में रखा जा सकता है। ऐसे मतदाताओं को अपनी स्थिति स्पष्ट करने और जरूरी दस्तावेज जमा करने का मौका मिलना चाहिए।
अधिकारी जवाब से संतुष्ट होने पर उनका नाम सूची में शामिल कर सकते हैं। दावा स्वीकार नहीं होने पर अस्वीकृति का कारण बताना चाहिए, ताकि संबंधित मतदाता फैसले को चुनौती दे सके। सुनवाई में अदालत की मुख्य चिंता यह रही कि पहले से पंजीकृत मतदाताओं को केवल समय पर फॉर्म जमा नहीं कर पाने या पता बदलने के कारण मतदान के अधिकार से वंचित होने की स्थिति का सामना न करना पड़े।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

ज़रूर पढ़ें (Latest News)

Live TV LIVE STREAM