छोटी दिवाली पर क्यों मनाई जाती है नरक चतुर्दशी? जानें श्रीकृष्ण और नरकासुर की कथा
Narak Chaturdashi 2026: दीपावली के पांच दिवसीय पर्व में छोटी दिवाली का खास महत्व है। आज, 7 नवंबर को नरक चतुर्दशी के अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण और नरकासुर से जुड़ी पौराणिक कथा याद की जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा की सहायता से अत्याचारी नरकासुर का वध किया था और उसकी कैद में बंद लोगों को मुक्त कराया था। इसी घटना की याद में नरक चतुर्दशी मनाई जाती है। इसे रूप चौदस और छोटी दिवाली के नाम से भी जाना जाता है।
क्या है नरक चतुर्दशी की पौराणिक कथा?
पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में नरकासुर नाम के असुर का आतंक बढ़ गया था। वह देवी-देवताओं और मनुष्यों को परेशान करता था। मान्यता है कि उसने कई ऋषि-मुनियों के साथ 16 हजार कन्याओं को भी बंदी बना लिया था। उसके अत्याचारों से परेशान होकर देवी-देवताओं ने भगवान श्रीकृष्ण से सहायता मांगी।
श्रीकृष्ण ने सत्यभामा के साथ किया नरकासुर का वध
धार्मिक कथा के मुताबिक, नरकासुर को वरदान प्राप्त था कि उसकी मृत्यु उसकी माता के हाथों ही होगी। सत्यभामा को भूदेवी का स्वरूप माना जाता है। इसी कारण भगवान श्रीकृष्ण उन्हें अपने साथ युद्ध में लेकर गए। युद्ध के दौरान सत्यभामा की सहायता से श्रीकृष्ण ने नरकासुर का अंत किया और बंदियों को आजाद कराया।
कथा के अनुसार, नरकासुर के वध से लोगों को उसके आतंक से मुक्ति मिली। इस खुशी में दीप जलाकर उत्सव मनाया गया। इसी घटना को नरक चतुर्दशी से जोड़कर देखा जाता है।
छोटी दिवाली पर दीप जलाने का क्या है महत्व?
नरक चतुर्दशी को बुराई पर अच्छाई की जीत और भय से मुक्ति का प्रतीक माना जाता है। इस दिन घरों में दीप जलाए जाते हैं और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है। कई परिवारों में सुबह स्नान, उबटन लगाने और घर के अलग-अलग हिस्सों में दीप रखने की परंपरा भी है।
छोटी दिवाली का संदेश यही है कि अंधकार कितना भी गहरा क्यों न हो, अच्छाई और साहस से उस पर विजय पाई जा सकती है। यह पर्व दीपावली की मुख्य रात से पहले घरों में उत्सव और रोशनी का माहौल बना देता है।

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