महाकाल मंदिर में VIP प्रवेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने याचिका ठुकराई, कहा ‘भगवान के सामने कोई वीआईपी नहीं!’

महाकाल मंदिर में VIP प्रवेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने याचिका ठुकराई, कहा ‘भगवान के सामने कोई वीआईपी नहीं!’

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हाई कोर्ट में खारिज होने के बाद इस मसले को सुप्रीम कोर्ट तक लाया गया 

नई दिल्ली। उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में वीआईपी प्रवेश नीति को चुनौती देने वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी। अदालत ने साफ कहा कि महाकाल के सामने कोई वीआईपी नहीं है और न्यायालय मंदिर प्रबंधन में दखल नहीं दे सकते।

सभी को प्रवेश दिया जाए या व्यवस्था बंद हो

वरिष्ठ वकील विष्णु शंकर जैन ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच के सामने अनुच्छेद 14 के तहत भेदभाव का आरोप लगाते हुए एक समान और पारदर्शी प्रवेश नीति की मांग की। उन्होंने कहा कि जिला कलेक्टर की सिफारिश पर चुनिंदा लोगों को वीआईपी श्रेणी में गर्भगृह में प्रवेश मिलता है, जबकि आम भक्तों को वंचित रखा जाता है। याचिकाकर्ता ने मांग की कि या तो सभी को प्रवेश हो या यह व्यवस्था पूरी तरह बंद हो।

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका के दावों को अनुचित माना 

 बेंच ने टिप्पणी की, कि मौलिक अधिकारों को गर्भगृह जैसे पवित्र स्थान पर लागू करने से अन्य दावे जैसे भाषण की स्वतंत्रता जैसे मुद्दे उठ सकते हैं। कोर्ट ने याचिका वापस लेने की इजाजत दी और प्राधिकरणों से बेहतर व्यवस्था के सुझाव देने को कहा। यह याचिका मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच के अगस्त 2025 के फैसले के खिलाफ दायर की गई थी, जहां भी ऐसी ही याचिका खारिज हो चुकी है। 

प्रबंधन समिति ने अपना पक्ष रखा

मंदिर प्रबंधन समिति का कहना है कि कोई स्थायी वीआईपी सूची नहीं है और अनुमतियां केस-टू-केस आधार पर दी जाती हैं। उज्जैन सांसद अनिल फिरोदिया ने भी आम श्रद्धालुओं के लिए गर्भगृह खोलने की मांग उठाई थी।

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