जबलपुर में गंदे पानी की आपूर्ति पर हाईकोर्ट में जनहित याचिका, इंदौर से तुलना की 

बरसात के मौसम में स्थिति और गंभीर, नलों से बेहद बदबूदार और गंदा पानी

जबलपुर। स्वच्छता के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पहचाने जाने वाले इंदौर का अब एक और संदर्भ में नाम लिया जा रहा है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में दायर एक जनहित याचिका में जबलपुर के नलों से गंदे पानी की आपूर्ति के मुद्दे को उठाया गया है। याचिका में चिंता जताई गई है कि कहीं जबलपुर की स्थिति भी इंदौर जैसी न हो जाए।


इस मामले में जबलपुर नगर निगम के आयुक्त, महापौर, जिला कलेक्टर, नगरीय प्रशासन के प्रमुख सचिव
और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग
को पक्षकार बनाया गया है। याचिकाकर्ता ने मामले की शीघ्र सुनवाई की मांग की है। तुलसी नगर निवासी अधिवक्ता ओपी यादव की ओर से दायर इस याचिका में अधिवक्ता रविंद्र गुप्ता पैरवी करेंगे। याचिकाकर्ता डेमोक्रेटिक लायर्स फोरम के अध्यक्ष हैं और 2019 से अपने इलाके में दूषित जल आपूर्ति के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। 

छह साल से चल रही समस्या

अधिवक्ता गुप्ता के अनुसार, चेरीताल और जयप्रकाश नगर क्षेत्र के निवासी पिछले छह वर्षों से इस समस्या से जूझ रहे हैं। कभी पेयजल की आपूर्ति ही नहीं होती और जब होती भी है, तो नलों से मटमैला और संक्रमित पानी निकलता है। नालों से रिसाव के कारण दूषित हुए इस पानी को छानकर या उबालकर पीने की मजबूरी है। इसके बावजूद परिवारों में बीमारियों का प्रकोप बढ़ता जा रहा है।

बारिश में स्थिति और विकराल  

याचिका में उल्लेख किया गया कि बरसात के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। नलों से बेहद बदबूदार और गंदा पानी आता है। क्योंकि, कई स्थानों पर पानी की पाइप लाइन नालियों और नालों से होकर गुजरती हैं। इन लाइनों में लीकेज की समस्या है जिसे ठीक नहीं किया जाता। 2019 और 2020 में भी शिकायतें दर्ज कराई गईं। लेकिन, नगर निगम की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

मीडिया रिपोर्ट्स संलग्न

जनहित याचिका के साथ 2019 से 2026 तक के समाचार पत्रों की कतरनें संलग्न की गई हैं। याचिका में सवाल उठाया गया है कि जब प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया लगातार इस मुद्दे को उजागर करते रहे हैं, तो नगर निगम इतना उदासीन क्यों है। विगत छह वर्षों में अनेक लोग पेट के संक्रमण और अन्य बीमारियों की चपेट में आए हैं।

फिल्टर प्लांट बंद, व्यवस्था चरमराई

याचिकाकर्ता का आरोप है कि फिल्टर प्लांट बंद पड़े हैं और पानी की गुणवत्ता जांचने का कोई विधिवत मापदंड नहीं है। जबलपुर की जनता को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है। अस्पतालों में दूषित जल से होने वाले संक्रमण के मरीजों की भीड़ लगी रहती है। हाल ही में गांव निगड़ी में 60 से अधिक लोग बीमार पड़े थे। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई है।

हाईकोर्ट से कमेटी गठन की अपील

याचिका में कहा गया है कि जबलपुर के 79 वार्डों में शिकायत निवारण की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं है। न कोई पोर्टल है, न कोई हेल्पलाइन नंबर, जिससे जनता 24 घंटे के भीतर समस्या का समाधान करा सके। करोड़ों रुपये के बजट का उपयोग कहां हो रहा है, इसका कोई लेखा-जोखा नहीं है।याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से उच्च स्तरीय कमेटी गठित करने और न्यायालय की निगरानी में समस्या के समाधान की व्यवस्था करने का अनुरोध किया है।

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