एसोसिएशन ने कहा, यह फैसला किसी समुदाय के खिलाफ नहीं, सुरक्षा कारणों से लिया
इंदौर। ज्वेलरी दुकानों में अब मास्क, हिजाब या कपड़े से चेहरा छुपाकर आने वाले ग्राहकों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। यानी गहने खरीदने वालों को अब चेहरा पूरी तरह से खुला रखना होगा। इंदौर चांदी-सोना व्यापारी एसोसिएशन ने शहर की सभी ज्वेलरी दुकानों के संचालकों से अपील की है कि मास्क, हिजाब या किसी भी तरह से चेहरा छुपाकर आने वाले ग्राहकों को गहने न दिखाए जाएं।

व्यापारियों के नाम लिखित पत्र जारी
इसके लिए एसोसिएशन के अध्यक्ष हुकुम सोनी और मंत्री बसंत सोनी ने व्यापारियों के नाम लिखित पत्र जारी किया है। कहा है कि ऐसे ग्राहकों को ही गहने खरीदने को दिखाएं, जिनके चेहरे सीसीटीवी में स्पष्ट दिखे एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि देश के कई शहरों में पिछले कुछ महीनों में चेहरा छुपाकर बदमाशों ने सराफा दुकानों में लूट की वारदात अंजाम दी हैं।
चेहरा छुपाकर दुकान में वारदात
अपराधी सीसीटीवी कैमरों से बचने के लिए मास्क या कपड़ों से चेहरा छुपाकर दुकान में घुसते हैं और वारदात के बाद फरार हो जाते हैं। इसी खतरे को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। व्यापारियों का कहना है कि यह फैसला किसी समुदाय विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरी तरह सुरक्षा कारणों से लिया गया है।
कई राज्यों में ऐसे नियम
इसी तरह का नियम बिहार में लागू किया जा चुका है। झारखंड में भी तैयारी है, जबकि उत्तर प्रदेश के वाराणसी और झांसी के सराफा बाजारों में बुर्का, मास्क वाले ग्राहकों के प्रवेश पर रोक के पोस्टर लगाए जा चुके हैं। बिहार में इस फैसले के बाद तीखा विवाद खड़ा हो गया था। मुस्लिम संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे धार्मिक भेदभाव बताया। बिहार राज्य अल्पसंख्यक आयोग ने इसे असंवैधानिक करार देते हुए प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग भी की, जिसके बाद यह मामला राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गया।