हाई कोर्ट ने इंदौर नगर निगम को आवारा कुत्तों के मामले में फटकार लगाई, अब सुनवाई 12 जनवरी को

नगर निगम के 2.39 लाख नसबंदी के दावे को भी हाई कोर्ट ने स्कैम बताया

    इंदौर। हाई कोर्ट ने शुक्रवार को आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर नगर निगम को जमकर फटकार लगाई। आवारा कुत्तों से जनता की सुरक्षा से जुड़े इस मुद्दे पर हाई कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है। सुनवाई के दौरान जब नगर निगम की तरफ से पक्ष रखा गया कि हमने 2 लाख 39 हजार से अधिक स्ट्रीट डॉग्स की नसबंदी कर दी और यह काम हर दिन जारी है। इस पर कोर्ट ने निगम के वकील को रोकते हुए कहा कि देखिए यह नसबंदी करना और आंकड़े बताना एक बहुत बड़ा घोटाला है। हम खुद वॉक करने निकलते हैं तो जगह-जगह आवारा श्वान नजर आते हैं।

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हाई कोर्ट के प्रशासनिक जज विजयकुमार शुक्ला, जस्टिस बीके द्विवेदी की खंडपीठ ने कहा कि छप्पन दुकान, सराफा, एमजी रोड कहीं भी चले जाइए, आवारा कुत्ते बैठे मिल जाएंगे। कॉलोनी में बच्चों का घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। बच्चे खेल नहीं पाते, साइकिल नहीं चला पाते। उनका सामाजिक विकास भी प्रभावित हो रहा है। आप इस समस्या पर ठोस कार्रवाई कीजिए, नहीं तो हम नसबंदी अभियान और अब तक किए स्टरलाइजेशन के मामले में न्यायिक जांच बैठा देंगे।

नगर निगम ने जब कहा कि शहर में दो स्थानों पर कैंप चल रहे हैं। अब तक 2 लाख 39 हजार की नसबंदी कर दी। इस पर हाई कोर्ट ने कहा कि यह तो कागजों में होगा, आपके पास इसका क्या सबूत क्या है! असलियत तो शहर में नजर आ रही, पैदल चलना मुश्किल है। निगम के वकील ने कहा कि जहां से भी सूचना आती है, वहां से श्वानों को उठाकर रैबीज इंजेक्शन लगाते हैं और नसबंदी करते हैं। इस पर हाई कोर्ट ने कहा कि सड़कों पर रात में निकलना मुश्किल है। बाइक, स्कूटर वाले टकरा रहे हैं। कुत्तों के झुंड हमला कर रहे हैं। इस पर निगम ने आश्वासन दिया कि हम और तेजी और सख्ती से अभियान चलाएंगे।

इंदौर आवारा कुत्तों का हब बन गया

जस्टिस शुक्ला ने निगम द्वारा कुछ नहीं किए जाने पर गहरी नाराजगी जाहिर की। कोर्ट ने कहा कि आप लोग 2 हजार रुपए एक श्वान के लिए खर्च कर रहे हो, यह वास्तव में बड़ा स्कैम है। इंदौर आवारा कुत्तों का हब बनता जा रहा है। हमने 25 नवंबर को कार्रवाई के निर्देश दिए थे, लेकिन आज तक कुछ नहीं किया गया। कहीं कोई अभियान ही नहीं चलाया गया।

आवारा कुत्तों को 12 जनवरी से पहले हटाना होगा 

इस मामले की सुनवाई अब 12 जनवरी को होगी। इससे पहले नगर निगम को प्रमुख स्थानों से आवारा श्वानों को हटाना होगा। हाई कोर्ट ने मामले में सीनियर एडवोकेट पीयूष माथुर को न्यायमित्र नियुक्त किया है। अधिवक्ता मनीष यादव भी इंटरविनर के रूप में पैरवी कर रहे हैं। जस्टिस द्विवेदी ने कहा, पूरे शहर में हर घर के आसपास कुत्ते बैठे रहते हैं। जब आप 2 लाख 39 हजार की नसबंदी कर चुके हैं फिर संख्या घटने के बजाय बढ़ क्यों रही है।

यहां भी लापरवाही हो रही

निगम नसबंदी करने, रैबीज इंजेक्शन लगाने के लिए कुत्तों को उठाकर ले जाता है, फिर दूसरी कॉलोनी में छोड़ जाता है। सिल्वर ऑक्स, चाणक्यपुरी, देवेंद्र नगर में आवारा कुत्तों की संख्या 40 के करीब हो गई है। हर 4-5 दिन में नए-नए श्वान यहां आ जाते हैं। बुजुर्ग, बच्चे और महिलाओं को रोजाना ये काट भी रहे हैं।

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