भोपाल-इंदौर के बीच 6 लेन एक्सप्रेस-वे का सर्वे शुरू, 2 घंटे में पूरा होगा सफर, 4000 करोड़ रुपए खर्च होंगे!
भोपाल। भोपाल और इंदौर के बीच सफर का समय घटाकर करीब 2 घंटे करने की तैयारी शुरू हो गई है। दोनों शहरों के बीच प्रस्तावित 160 किलोमीटर लंबे 6 लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे के लिए नए मार्ग का सर्वे शुरू हो चुका है। इस परियोजना पर करीब 4000 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। एक्सप्रेस-वे बनने से न केवल भोपाल और इंदौर के बीच आवागमन आसान होगा, बल्कि देवास और सीहोर जिलों की कनेक्टिविटी भी मजबूत होगी।
आष्टा विधायक गोपाल सिंह इंजीनियर के मुताबिक, एक्सप्रेस-वे के लिए आष्टा विधानसभा क्षेत्र में सर्वे का काम शुरू कर दिया गया है। सिद्धिगंज और खाचरोद समेत 7 गांवों में सर्वे किया जा रहा है। आष्टा वन विभाग के रेंजर नवनीत झा ने बताया कि प्रस्तावित मार्ग करीब 9 किलोमीटर तक वन भूमि से होकर गुजरेगा। ऐसे में इस हिस्से में निर्माण की योजना के लिए वन क्षेत्र से जुड़े पहलुओं का भी ध्यान रखना होगा।
सीहोर से देवास होते हुए इंदौर पहुंचेगा मार्ग
प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे भोपाल से शुरू होकर सीहोर जिले के इछावर और आष्टा विधानसभा क्षेत्र से गुजरेगा। इसके बाद देवास जिले के चापड़ा और हाटपिपलिया होते हुए डबल चौकी के रास्ते इंदौर तक पहुंचेगा। नए मार्ग का उद्देश्य दोनों प्रमुख शहरों के बीच तेज और सुगम आवागमन उपलब्ध कराना है।
इस परियोजना से सीहोर और देवास जिले के लोगों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है। इन क्षेत्रों की भोपाल और इंदौर जैसे बड़े शहरों तक पहुंच आसान होगी। साथ ही, बेहतर सड़क संपर्क से औद्योगिक गतिविधियों, व्यापार और स्थानीय विकास को गति मिल सकती है।
मंडीदीप और पीथमपुर के बीच भी बेहतर संपर्क
करीब 4000 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले इस 6 लेन एक्सप्रेस-वे को पूरी तरह नियंत्रित प्रवेश वाली सड़क के रूप में विकसित करने की योजना है। इससे अनियंत्रित यातायात और बीच रास्ते से वाहनों के प्रवेश की समस्या कम करने में मदद मिल सकती है। यह मार्ग प्रदेश के दो प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों मंडीदीप और पीथमपुर के बीच संपर्क मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभा सकता है।
साढ़े 3 घंटे का सफर 2 घंटे में पूरा होगा
फिलहाल भोपाल से इंदौर के बीच सड़क मार्ग से सफर करने में करीब 3 से साढ़े 3 घंटे लगते हैं। प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे बनने के बाद यह समय घटकर लगभग 2 घंटे रह जाने का अनुमान है। हालांकि, यात्रा समय में वास्तविक कमी मार्ग की अंतिम रूपरेखा, प्रवेश-निकास व्यवस्था और यातायात की परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। परियोजना पूरी होने पर प्रदेश के दो प्रमुख शहरों के बीच आवागमन को नई गति मिलने की उम्मीद है।

Leave a Reply