टीएमसी के 20 बागी सांसदों का एनसीपी में विलय, ‘असली टीएमसी’ की लड़ाई अब कोर्ट तक पहुंचेगी ! 

टीएमसी के 20 बागी सांसदों का एनसीपी में विलय, ‘असली टीएमसी’ की लड़ाई अब कोर्ट तक पहुंचेगी ! 

टीएमसी के 20 बागी सांसदों का एनसीपी में विलय, ‘असली टीएमसी’ की लड़ाई अब कोर्ट तक पहुंचेगी! 

    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बागी गुट के 20 सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी (एनसीपी) में विलय का ऐलान कर दिया है। बागी खेमे के नेता सुदीप बंदोपाध्याय ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सभी सांसद अब एनसीपी का हिस्सा हैं और आगे चलकर वे स्वयं को वास्तविक तृणमूल कांग्रेस के रूप में स्थापित करने का दावा करेंगे। उनका कहना था कि असली पार्टी कौन है, इसका फैसला अंततः कोर्ट करेगा। बागियों में ही सहमति नहीं  इस मुद्दे पर बागी खेमे के भीतर भी पूरी तरह एक राय दिखाई नहीं दी। सांसद शताब्दी रॉय ने चुनाव चिह्न पर दावा करने संबंधी किसी स्पष्ट घोषणा से दूरी बनाई। उन्होंने कहा कि इस विषय में अंतिम निर्णय लोकसभा अध्यक्ष के स्तर पर होगा। विलय की घोषणा के दौरान सुदीप बंदोपाध्याय ने जिस नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी का उल्लेख किया, उसके बारे में भी कई सवाल खड़े हो गए हैं। उन्होंने इसे मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय दल बताया, जबकि चुनाव आयोग के अभिलेखों में यह पार्टी गैर-मान्यता प्राप्त श्रेणी में दर्ज है। ऐसी पार्टियों को न तो राष्ट्रीय अथवा राज्य स्तरीय पार्टी का दर्जा प्राप्त होता है और न ही कोई स्थायी चुनाव चिन्ह मिलता है।

इस विलय में कई उलझने 
 दिलचस्प बात यह है कि अब तक NCP की ओर से कोई अधिकृत प्रतिनिधि सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। पार्टी की संगठनात्मक संरचना, पदाधिकारियों और राजनीतिक गतिविधियों को लेकर भी स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस विलय को लेकर कानूनी और प्रक्रियागत चुनौतियां सामने आ सकती हैं।

यह मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल नहीं 
 पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार पार्टी का पूरा नाम “नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया” है। इसका पंजीकरण 20 जनवरी 2023 को हुआ था और इसका पता हावड़ा, पश्चिम बंगाल दर्ज है। वेबसाइट पर इसे गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल बताया गया है।

एनसीपी के खाते में मात्र 75 रूपए 
 पार्टी द्वारा वित्त वर्ष 2022-23 के लिए प्रस्तुत फॉर्म 24A और ऑडिट रिपोर्ट से भी कई रोचक तथ्य सामने आते हैं। फॉर्म 24A राजनीतिक दलों को प्राप्त चंदे का विवरण देने के लिए जमा किया जाता है, जो आयकर संबंधी प्रक्रियाओं में भी महत्वपूर्ण माना जाता है। ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार 31 मार्च 2023 को समाप्त वित्त वर्ष के अंत में पार्टी के खाते में केवल 75 रुपये शेष थे। चंदे के विवरण को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। केंद्र सरकार ने वर्ष 2017 में नियम बनाया था कि राजनीतिक दल 2,000 रुपये से अधिक का नकद चंदा स्वीकार नहीं कर सकते। उपलब्ध दस्तावेजों में दर्शाया गया है कि पार्टी को प्राप्त सभी दान नकद रूप में दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा दानदाताओं के पेन नंबर का उल्लेख भी नहीं किया गया है।

जो पार्टी अध्यक्ष, उसी ने चंदा भी दिया 
 दस्तावेजों में एक और विसंगति सामने आई है। फॉर्म 24 ए पर पार्टी अध्यक्ष के रूप में शेवली कुंडू के हस्ताक्षर हैं, जबकि उसी फॉर्म में दानदाता के रूप में भी उनका नाम दर्ज है। इससे दस्तावेजों की पारदर्शिता और प्रक्रिया को लेकर नए प्रश्न खड़े हो गए हैं। टीएमसी के बागी सांसदों के इस कदम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि चुनाव आयोग, लोकसभा अध्यक्ष और न्यायालय इस पूरे घटनाक्रम को किस दृष्टि से देखते हैं तथा बागी गुट के दावों का भविष्य क्या होता है।

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