इंदौर नगर निगम से कुत्तों के बर्थ कंट्रोल पर हाई कोर्ट ने जवाब मांगा, आवारा कुत्तों के आतंक पर सख्ती

सड़कों पर कुत्तों के बढ़ते झुंड बच्चों और बुजुर्गों के लिए खतरा बन रहे

इंदौर। आवारा कुत्तों की शहर में बढ़ती समस्याओं और उनके काटने की घटनाओं को लेकर मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने कड़ा रुख अपनाया है। सामाजिक कार्यकर्ता रूपेश शर्मा द्वारा एडवोकेट गगन बजाड़ के जरिए दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए, जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार और नगर निगम कमिश्नर को नोटिस जारी किया है।

कोर्ट ने पूछा कि अब तक क्या किया गया? न्यायालय ने नगर निगम से स्पष्ट जवाब मांगा है कि आवारा कुत्तों की संख्या को नियंत्रित करने के लिए बर्थ कंट्रोल (नसबंदी) के क्षेत्र में अब तक क्या ठोस कार्रवाई की गई? याचिका में तर्क दिया गया कि सड़कों पर कुत्तों के बढ़ते झुंड नागरिकों, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए खतरा बन रहे हैं। लेकिन, निगम का नसबंदी अभियान कागजों तक ही सीमित नजर आ रहा है।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का असर

यह सुनवाई ऐसे समय में हुई जब हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी सड़कों से आवारा कुत्तों और जानवरों को हटाए जाने की आवश्यकता पर बल दिया है। याचिकाकर्ता के अनुसार, नगर निगम आवारा कुत्तों के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार है, लेकिन उचित निगरानी और प्रभावी नसबंदी कार्यक्रम के अभाव में शहर की स्थिति बिगड़ती जा रही है। हाई कोर्ट द्वारा मांगा गया यह जवाब तय करेगा कि आने वाले दिनों में इंदौर की सड़कों को सुरक्षित बनाने के लिए नगर निगम क्या नई कार्ययोजना पेश करता है।

Indore stray dogs, Stray dog birth control, Indore High Court news, Dog attacks in Indore, Indore Municipal Corporation, Stray dog menace, Dog sterilization program, Public interest litigation Indore, Rising dog bite cases, Urban animal control India

इंदौर आवारा कुत्ते, कुत्तों का बर्थ कंट्रोल, इंदौर हाई कोर्ट, डॉग अटैक इंदौर, नगर निगम इंदौर, आवारा कुत्तों की समस्या, कुत्ता नसबंदी अभियान, इंदौर जनहित याचिका, बच्चों पर कुत्तों का हमला, इंदौर कुत्ता आतंक

Leave a Comment