अयोध्या। भव्य राम मंदिर में दान चोरी की हालिया घटना के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने एक बड़ा और कड़ा निर्णय लिया है। ट्रस्ट ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के साथ मिलकर चढ़ावे की गिनती की पूरी प्रक्रिया और व्यवस्था में व्यापक बदलाव कर दिया है। अब मंदिर में आने वाली नकद धनराशि की गिनती की जिम्मेदारी किसी निजी एजेंसी के हाथों में न होकर पूरी तरह से स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के स्थायी और नियमित कर्मचारियों के पास होगी।
पुरानी पूरी टीम सेवा से बाहर, 36 कर्मचारियों की छुट्टी
दान प्रबंधन में पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ट्रस्ट ने गिनती के कार्य में लगे सभी 36 कर्मचारियों को हटा दिया है। पूर्व में 23 कर्मचारियों को कार्यमुक्त किया गया था, और अब शेष 13 कर्मचारियों को भी जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया है। इसके साथ ही वर्षों से इस कार्य में लगी पुरानी टीम का अस्तित्व पूरी तरह समाप्त हो गया है। उल्लेखनीय है कि दान चोरी के आरोप में गिरफ्तार किए गए 8 आरोपी इन 36 कर्मचारियों में शामिल नहीं थे। इसके बावजूद, प्रशासनिक स्तर पर सुधार लाने के लिए ट्रस्ट ने केवल आरोपियों पर कार्रवाई करने के बजाय पूरी व्यवस्था को ही बदलने का फैसला किया।
वाराणसी की प्राइवेट एजेंसी के जरिए हुई थी तैनाती
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, हटाए गए कर्मचारी न तो ट्रस्ट के सीधे कर्मचारी थे और न ही बैंक के नियमित स्टाफ। उन्हें वाराणसी की एक निजी एजेंसी के माध्यम से हाउसकीपिंग स्टाफ के रूप में रखा गया था, जिन्हें बाद में दान गिनने का काम सौंप दिया गया था। इन सभी कर्मचारियों को अपने पहचान पत्र और पोशाक जमा करने के निर्देश दिए गए हैं तथा अगले दिन से ड्यूटी पर न आने को कहा गया है।
हटाया गया स्टाफ असंतुष्ट, ठेकेदारों पर भी कार्रवाई
काम से अचानक निकाले गए कर्मचारियों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें हटाने से पहले कोई आधिकारिक नोटिस या स्पष्ट कारण नहीं बताया गया। उनका कहना है कि उन्होंने व्यक्तिगत स्तर पर कोई लापरवाही या गलती नहीं की थी। कर्मचारियों के अनुसार, निजी एजेंसी को प्रति व्यक्ति लगभग 26000 रुपये का भुगतान किया जाता था, जबकि उन्हें मासिक वेतन के रूप में केवल 15000 रुपये मिलते थे।
ट्रस्ट के सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि इन कर्मचारियों को परिसर में किसी अन्य कार्य पर भी तैनात नहीं किया जाएगा। इसके अलावा, सफाई और रखरखाव से जुड़े कई अन्य पुराने ठेकेदारों को भी हटाया जा रहा है, ताकि मंदिर के संवेदनशील कार्यों में सीधी जवाबदेही और निगरानी को और मजबूत किया जा सके। अब एसबीआई की विभिन्न शाखाओं से आए बैंक कर्मी ही इस काम को संभालेंगे।