राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण में पहली एफआईआर दर्ज, 8 लोगों पर जालसाजी और धोखाधड़ी के आरोप !

राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण में पहली एफआईआर दर्ज, 8 लोगों पर जालसाजी और धोखाधड़ी के आरोप !

अयोध्या। राम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए गए चढ़ावे और दान राशि में कथित वित्तीय अनियमितता तथा गबन के आरोपों ने अब कानूनी रूप ले लिया है। उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश और विशेष जांच दल (एसआईटी) की प्रारंभिक रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों के आधार पर अयोध्या पुलिस ने इस मामले में पहली एफआईआर दर्ज कर ली है। यह मामला श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की आधिकारिक शिकायत पर कायम किया गया है। पुलिस ने इस प्रकरण में 8 लोगों को नामजद करते हुए उनके खिलाफ जालसाजी, धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात से संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है। एफआईआर में ट्रस्ट के किसी सदस्य का नाम शामिल नहीं किया गया है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का नाम भी इस प्रकरण में नहीं है, हालांकि उनके चालक टिन्नू यादव को आरोपियों में शामिल किया गया है। मुकदमे में जिन लोगों को नामजद किया गया है उनमें रमाशंकर मिश्रा, टिन्नू यादव, मनीष यादव, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय और सुभाष श्रीवास्तव के नाम शामिल हैं।

गंभीर धाराओं में दर्ज हुआ मामला
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 306, 316(5), 317(4), 317(5), 61 और 3(5) के तहत अपराध दर्ज किया है। एफआईआर दर्ज होने के बाद जांच एजेंसियों ने दस्तावेजों की पड़ताल तेज कर दी है और आरोपियों की भूमिका की गहन जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस तथा एसआईटी की टीमें संभावित सबूत जुटाने और संबंधित लोगों से पूछताछ की तैयारी में जुटी हैं।

केजरीवाल के दौरे से गरमाई सियासत
इस बीच आम आदमी पार्टी के संस्थापक और वरिष्ठ नेता अरविंद केजरीवाल के अयोध्या दौरे ने इस विवाद को राजनीतिक रंग भी दे दिया है। अयोध्या पहुंचते ही उन्होंने राम मंदिर ट्रस्ट विवाद को लेकर विरोधियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि वे रामलला के दरबार में उन लोगों के विरोध के लिए आए हैं जिन्होंने भगवान के नाम पर मिले चंदे में गड़बड़ी की और मंदिर की संपत्ति तक को नुकसान पहुंचाया।
केजरीवाल के इस बयान के बाद अयोध्या का संत समाज भी दो हिस्सों में बंटा नजर आया। पुरोहित समाज और सनातन रक्षक दल ने उनके विरोध का ऐलान करते हुए काले झंडे दिखाने और पुतला दहन करने की घोषणा की है।

किन धाराओं में क्या हैं दंड

  • एफआईआर में शामिल बीएनएस की धारा 306 उन मामलों में लागू होती है, जहां कोई कर्मचारी या भरोसेमंद व्यक्ति अपने पद का दुरुपयोग कर मालिक की संपत्ति का गबन या चोरी करता है।
  • धारा 316(5) पेशेवर जिम्मेदारी निभाने वाले व्यक्तियों द्वारा किए गए विश्वासघात से संबंधित है। यदि कोई एजेंट, व्यापारी, बैंकर, दलाल या अन्य पेशेवर व्यक्ति अपने पद का दुरुपयोग कर संपत्ति या अधिकारों के साथ धोखा करता है, तो दोष सिद्ध होने पर उसे 10 वर्ष तक की कैद और जुर्माने की सजा हो सकती है।
  • धारा 317(4) चोरी के माल की आदतन खरीद-फरोख्त करने वालों पर लागू होती है। ऐसे मामलों को गंभीर और गैर-जमानती अपराध माना जाता है।
  • वहीं धारा 317(5) चोरी या गबन की गई संपत्ति को छिपाने, नष्ट करने अथवा उसे एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में सहायता करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान करती है। इस अपराध में दोषी पाए जाने पर 3 वर्ष तक की जेल, जुर्माना या दोनों सजाएं दी जा सकती हैं।
    मामले में दर्ज एफआईआर के बाद अब जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई और एसआईटी की विस्तृत रिपोर्ट पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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